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नहीं बदली व्यवस्था, लाइनों में ही धक्के खाते रहे मरीज

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IGMC lab dispute not solve
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आईजीएमसी में टेस्ट करवाने के लिए दूसरे दिन भी लगती रही लंबी लाइनें
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सैंपल भी दोपहर एक बजे तक ही लिए गए
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) से एसआर लैब के काम बंद करने के बाद पैदा हुई दिक्कतों का समाधान मंगलवार को भी नहीं हो पाया। आईजीएमसी में अब सारे टेस्ट सरकारी लैब में हो रहे हैं। इस कारण सरकारी लैब में बढ़े बोझ से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कुछ टेस्ट ऐसे भी हैं जिन्हें निजी लैब में करवाना पड़ता है।
लोग मंगलवार को भी लाइनों में लग रहे। समस्याओं का समाधान अस्पताल प्रबंधन नहीं कर पाया है। लाइनों के फेर में फंसे मरीजों को राहत देने के लिए अभी तक कोई पुख्ता रूपरेखा भी अस्पताल प्रबंधन तय नहीं कर सका है। दूसरे दिन भी चिकित्सकों के टेस्ट लिखने के बाद सैंपल के लिए खाली ट्यूब लेने फिर शुल्क जमा करने और इसके बाद सैंपल देने को मरीजों की लाइनें लगती रहीं।
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लोगों ने सैंपल लेने का समय बढ़ाने का आग्रह अस्पताल प्रबंधन से किया था लेकिन यह समय भी नहीं बदला। मंगलवार को भी सैंपल सुबह नौ से दोपहर एक बजे तक ही लिए गए। इस कारण मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। आईजीएमसी में प्रदेशभर से मरीज उपचार करवाने आते हैं। अस्पताल में जिन मरीजों को चिकित्सकों ने दोपहर एक बजे के बाद टेस्ट लिखे वह सैंपल जमा नहीं करवा पाए। इन मरीजों को अब बुधवार को फिर सुबह सैंपल देने के लिए अस्पताल आना होगा।
अस्पताल में किए सभी टेस्ट
आईजीएमसी के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राहुल गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में रुटीन से संबंधित सभी टेस्ट किए जा रहे हैं। इससे मरीजों को कोई परेशानी नहीं होने दी जा रही है।
समय पर नहीं मिली मरीज
की रिपोर्ट, देरी से हुआ ऑपरेशन
निजी लैबों में बढ़ गया है टेस्ट का काम
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। आईजीएमसी में एसआर लैब बंद होने के कारण निजी लैबों का काम बढ़ गया है। इस कारण निजी लैब समय पर मरीजों को रिपोर्ट नहीं दे पा रही। मंगलवार को एक मरीज का गले का ऑपरेशन टेस्ट रिपोर्ट समय पर न मिलने के कारण देरी से शुरू हुआ। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में बिलासपुर के रहने वाले एक मरीज के गले में बनी गांठ का ऑपरेशन होना था। सोमवार देर शाम मरीज ने अस्पताल के परिसर के बाहर एक निजी लैब में टीएफटी (थायरायड) टेस्ट करवाया। सरकारी लैब में एक बजे तक ही सैंपल लिए जाते हैं तो मजबूरन मरीज ने बाहर टेस्ट के लिए सैंपल दिया था। तीमारदार प्रताप सिंह ने बताया कि लैब संचालकों ने दो से तीन घंटों के भीतर टेस्ट रिपोर्ट आने का दावा किया। लेकिन मंगलवार सुबह ग्यारह बजे तक रिपोर्ट नहीं मिली। इस कारण डॉक्टरों ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद ही ऑपरेशन हो पाएगा। इसके बाद पौने बारह बजे के करीब रिपोर्ट मिली। तब जाकर मरीज का ऑपरेशन हो सका। वहीं दूसरी ओर निजी लैबों में मरीजों के टेस्ट करवाने वाले मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। कुछ निजी संचालकों ने बताया कि पहले जहां 100 के करीब टेस्ट सैंपल जांच के लिए आते थे वहीं अब अलग अलग लैबों में टेस्ट सैंपलों की कुल संख्या 200 से 300 की पहुंच गई हैं। आईजीएमसी परिसर के बाहर खुली निजी लैबों में शाम तक मरीजों की टेस्ट को लेकर लंबी कतारें लगी रहती हैं।
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सरकारी लैब में 300 सैंपलों की हुई जांच
आईजीएमसी प्रबंधन का दावा है कि मंगलवार को टीएफटी (थायराइड) के सैंपलों की सरकारी लैब में जांच की गई है। शाम तक 300 विभिन्न सैंपलों की जांच की गई थी। इनमें 70 टीएफटी के सैंपल थे।
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