प्रदेश वन विभाग में कार्यरत 1986 और उसके बाद के बैच के आधा दर्जन आईएफएस अफसर तीन साल से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। वर्तमान में इस बैच के अधिकारी सीसीएफ पद पर हैं। अन्य प्रदेशों में इसी पद के अधिकारी एपीसीसीएफ और कुछ जगह पीसीसीएफ बन गए हैं। 2012 से अब तक कई दर्जन आईएफएस, आईपीएस अफसरों को पदोन्नति मिल गई।
वन विभाग में एपीसीसीएफ से पीसीसीएफ, डीएफओ से कंजरवेटर, कंजरवेटर से चीफ कंजरवेटर तक के प्रमोशन हुए। लोअर रैंक में भी पदोन्नति दी गई, लेकिन 1986 और उसके बाद के अफसर टकटकी लगाए हैं। इन अधिकारियों के प्रमोशन की फाइल मंत्री तक पहुंची तो है, लेकिन उस पर फैसला नहीं हो सका है।
धूमल के खास अफसर बने देरी की वजह
प्रमोशन पर ब्रेक का कारण साल 2012 में तत्कालीन धूमल सरकार में प्रशासनिक पद पर हुई एक आईएफएस अधिकारी की नियुक्ति को बताया जा रहा है। साल 2012 में सरकार जाने से पहले तत्कालीन सरकार ने 1985 बैच के चहेते आईएफएस अफसर को पदोन्नति दे दी थी। इसके बाद सत्ता परिवर्तन हो गया।
इस सरकार के कुछ नेताओं ने उस अधिकारी को रिवर्ट करने की घोषणा कर दी। चूंकि, पदोन्नति नियमानुसार डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी की सिफारिशों और केंद्र की अनुमति के आधार पर हुई थी। लिहाजा, उस अधिकारी को सरकार चाह कर भी रिवर्ट नहीं कर सकी। इसकी खीज अब उसके बाद के अफसरों को झेलनी पड़ रही है।
दूसरे प्रदेशों में एपीसीसीएफ तक पहुंचे अफसर
अन्य प्रदेशों में 1986 बैच के अफसर एपीसीसीएफ और कुछ जगह पीसीसीएफ तक पहुंच चुके हैं। अन्य जगह 1989 बैच तक के अधिकारी प्रमोशन पाकर आगे बढ़ गए हैं। हिमाचल में 1986 बैच के अफसर अब तक सीसीएफ पर ही अटके हैं।
इसके बाद बैच के भी अफसर भी अपने बैच की डीपीसी का इंतजार कर रहे हैं। नियमानुसार एपीसीसीएफ से पीसीसीएफ बनने को भी 30 साल की सर्विस की शर्त पूरी करनी होती है। इसे प्रदेश के 1985 बैच के अधिकारी पूरा कर चुके हैं।
Published by Arvind Thakur