बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि मैं शारीरिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ हूं। ऐसा इसलिए हूं क्योंकि मेरा मन शांत है। मुझे कोई चिंता नहीं है। केवल शारीरिक स्तर पर ही नहीं, मानसिक शांति के स्तर पर भी मैं दूसरों की सेवा करने के लिए 15 या 20 साल और जीऊंगा। जब हम कठिनाइयों का सामना करते हैं तो हम जो भी पढ़ते हैं वह हमें साहस और आत्मविश्वास देता है।
दलाईलामा इन दिनों मैक्लोडगंज स्थित अपने निवास स्थान से ऑनलाइन टीचिंग दे रहे हैं। नालंदा शिक्षा के प्रतिनिधियों के अनुरोध पर दलाईलामा ऑनलाइन टीचिंग दे रहे हैं। दलाईलामा ने कहा कि आमतौर पर हम अपने संवेदी अनुभवों से विचलित होते हैं, लेकिन ये वास्तव में हमारी मानसिक चेतना पर निर्भर होते हैं। इनमें से कुछ हम अक्सर अनजान होते हैं। अत: हमें मन की चंचलता को विकसित करने की आवश्यकता है।
हमें ध्यान का अभ्यास करने की आवश्यकता है। ध्यान का अभ्यास करते समय पहले ऐसा लगता है कि कुछ खाली है, लेकिन बाद में स्पष्टता उभरती है। शुरू करने के लिए हम केवल कुछ सेकेंड के लिए ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होंगे, फिर कुछ मिनट। समय के साथ हम गहरा अनुभव प्राप्त करते हैं। कोरोना महामारी के कारण बहुत से लोग पीड़ित हैं। हमें करुणा को एक समझ के साथ संयुक्त करने की आवश्यकता है कि महामारी के खतरे को एहतियाती उपाय करके दूर किया जा सकता है।