हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के लॉन्ग और लोकल ढाई सौ रूटों पर बसें नहीं चल रही हैं। कारण, निगम के पास स्टाफ ही नहीं है। यही नहीं, 21 जुलाई से परिवहन निगम की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं।
कर्मचारी 21 जुलाई से वर्क टू रूल पर जाएंगे। संयुक्त समन्वय समिति ने निगम प्रबंधन को वर्क टू रूल के तहत काम करने का अल्टीमेटम दे दिया है। इससे निगम के और रूटों पर बसें चलना बंद हो सकती हैं। निगम की करीब 300 बसें सड़कों पर खड़ी धूल फांक रही हैं। इन्हें चलाने के लिए निगम के पास न तो ड्राइवर हैं और न ही कंडक्टर।
हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के अध्यक्ष हरदयाल सिंह, उपाध्यक्ष रूप चंद, सचिव खेमेंद्र गुप्ता, प्रवक्ता राजेंद्र सिंघा, कोषाध्यक्ष सुरेश ठाकुर सहित सदस्य राजेंद्र ठाकुर, देवराज ठाकुर, विद्या सागर, रोशन चौहान, गोपाल लाल, नानक शांडिल, युद्ध राज, सुखराम और चंद्रमणी सोनी ने कहा कि समन्वय समिति वर्क टू रूल के फैसले पर अडिग है।
इनका कहना है कि सरकार और निगम प्रबंधन कर्मचारियों द्वारा समय समय पर अनेकों मांगे उठाई गई लेकिन इन्हें नजरअंदाज किया गया। निगम में नई भर्ती नहीं की जा रही।
ये हैं मुख्य मांगें
20 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके कंडक्टरों को दो विशेष वेतन वृद्धियां
चार, छह हजार पर काम कर रहे ड्राइवरों-कंडक्टरों को अधिसूचना के अनुसार वेतन
पीस मील कर्मचारियों को एकमुश्त अनुबंध पर लाना
ग्रेड पे से वंचित कर्मचारियों व अधिकारियों को ग्रेड पे देना
कर्मचारियों के लंबित ओवरटाइम की अदायगी एकमुश्त करना
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय लाभ जल्द जारी करना