हिमाचल विश्वविद्यालय में कुलपति पर हुए हमले के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। विवि में बिगड़े माहौल से खफा मुख्य प्रशासनिक पदों पर कार्य कर रहे विवि के सात वरिष्ठ अधिकारियों ने वीरवार को कुलपति को इस्तीफे सौंप दिए।
उसके बाद वीसी ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मिलकर इस मसले पर 20 मिनट चर्चा की। अधिकारियों ने ये कहते हुए इस्तीफे दिए हैं कि विवि में मौजूदा हालात ऐसे हो गए हैं कि वे अतिरिक्त कार्यभार निभाने में असमर्थ हैं।
हिमाचल विवि के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि छात्रों ने कुलपति से हाथापाई की हो। कुलपति की सुरक्षा नहीं कर पाई पुलिस भी इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही। नतीजतन अफसरों ने सामूहिक इस्तीफा देने का फैसला किया।
दहशत में हैं अधिकारी
इस्तीफा देने वालों में से एक चीफ वार्डन प्रो. रघुविंद्र सिंह ने दोपहर बाद बैठक कर संयुक्त रूप से सौंपे इस्तीफों में अतिरिक्त कार्यभार के पदों को छोड़ने की इच्छा जताई है।
इस्तीफा देने वालों में रजिस्ट्रार प्रो. मोहन झारटा, डीन ऑफ स्टडीज प्रो. टीसी भल्ला, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. एमएस चौहान, डीन ऑफ कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल प्रो. एसएस चौहान, चीफ वार्डन प्रोफेसर प्रो. रघुविंद्र सिंह, डीन प्लानिंग एंड टीचर्स वेलफेयर पीके आहलुवालिया और परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्याम लाल कौशल हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय में बने मौजूदा हालात में वे अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। छात्र नेता अधिकारियों को परिसर में प्रवेश करने से रोक रहे हैं। प्रो वीसी प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान ने इस्तीफे मिलने की पुष्टि की है।
हिंसा मामले में करेंगे कार्रवाईः सीएम
वहीं, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने एचपीयू में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए डीसी और एसपी को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विवि में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई होगी।
सीएम के दिशा निर्देश के बाद विवि परिसर में धारा 144 भी लागू कर दी गई है। यहां पुलिस बल की तैनाती की गई है। पूरा यूनिवर्सिटी छावनी में तबदील हो गया है। वहीं, तनाव के चलते पढ़ाई भी ठप हो गई है।
उधर, छात्र संगठनों ने मांगें पूरी न होने के बाद आंदोलन को और तेज कर दिया है। एचपीयू परिसर में प्रशासनिक अधिकारियों के आने पर रोक लगा दी है। इन अधिकारियों के साथ आए दिन धक्कामुक्की हो रही है।