मेजर जनरल सेवानिवृत्त डीवीएस राणा
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राज्य लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल सेवानिवृत्त डीवीएस राणा सोमवार को करीब चार वर्ष का सेवाकाल पूरा करने के बाद सेवानिवृत्त हुए। अपने कार्यकाल में बंपर भर्तियां करने वाले अध्यक्ष को क्लास वन और टू की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए साल 1971 में बनी चयन प्रक्रिया में बदलाव न कर पाने का मलाल रह गया। जिन पदों को भरने के लिए आरएंडपी नियम स्पष्ट नहीं हैं, उन्हें सिर्फ इंटरव्यू के अंकों के आधार पर नहीं भरने का इन्होंने फैसला लिया था।
लिखित परीक्षा के 65 फीसदी और इंटरव्यू के 35 फीसदी अंकों के आधार पर उम्मीदवारों का चयन करने का प्रस्ताव सरकार को आयोग ने भेजा था, लेकिन प्रस्ताव सिरे नहीं चढ़ सका। सेवानिवृत्त होने से पहले सोमवार को आयोग कार्यालय में प्रेस वार्ता में अध्यक्ष मेजर जनरल डीवीएस राणा ने कहा कि हिमाचल के युवाओं के मन से यह डर दूर होना चाहिए कि लिखित परीक्षा के आधार पर नौकरियां मिलने से बाहरी राज्यों के अधिक लोग आ सकेंगे।
प्रदेश के युवाओं में बहुत प्रतिभा है। बीते दिनों एचएएस के पर्सनैलिटी टेस्ट में चयनित कुल 30 युवाओं में से 29 हिमाचल के थे। बाहरी राज्यों के करीब सात हजार युवाओं ने परीक्षा में भाग लिया था। बताया कि एचएएस की परीक्षा से दो वैकल्पिक विषयों को समाप्त करना चाहिए। कुछ विषयों में अधिक अंक आते हैं, ऐसे में कई युवा उन्हीं वैकल्पिक विषयों को चुनते हैं। इससे मेरिट में बहुत अंतर आ जाता है।
देश के 17 राज्यों ने वैकल्पिक परीक्षा खत्म कर दी है। हिमाचल में भी ऐसा होना चाहिए। विभिन्न विभागों में असिस्टेंट इंजीनियरों के लिए एक ही संयुक्त भर्ती परीक्षा आयोजित करने की मांग भी सरकार से उठाई। बताया कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी कर दी गई है। इंटरव्यू पैनल को यह पता नहीं होता कि कौन से जिले या गांव से युवा आया है। पैनल का चयन भी एक रात पहले किया जाता है। ग्रेडिंग के आधार पर अंक दिए जाते हैं। पैनल के लोग आपस में कोई चर्चा भी कर सकते हैं।
उन्होंने आयोग के अध्यक्ष पर नियुक्ति देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का आभार जताया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार जताते हुए कहा कि मैंने आयोग को लेकर जो भी मांग उठाई, उसे सरकार ने पूरा किया।