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आखिर पूरी हुई डॉक्टरों की बड़ी मांग, सदन में पारित हुआ मेडिपर्सन एक्ट

Fri, 31 Mar 2017 01:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल प्रदेश के अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों से मारपीट करना अब गैर जमानती अपराध होगा। मारपीट करने पर आरोपियों को जमानत नहीं मिल सकेगी। जुर्म साबित होने पर अब एक के बजाय 3 साल की कैद होगी।
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प्रदेश विधानसभा में वीरवार को इसके लिए संशोधन विधेयक पेश किया गया था जिसे शुक्रवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने सुबह के समय इस विधेयक को सदन में रखा।

बाद में इस पर चर्चा हुई। आखिरकार सभी ने इसपर अपनी सहमति देकर इसे पारित कर दिया। कौल सिंह ठाकुर ने वीरवार को हिमाचल प्रदेश चिकित्सीय सेवा व्यक्ति और चिकित्सीय सेवा संस्था (हिंसा और संपत्ति के नुकसान का निवारण) संशोधन विधेयक 2017 को विधानसभा में रखा था।
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इससे पहले 2009 के अधिनियम में यह व्यवस्था थी कि जो कोई भी डॉक्टरों के खिलाफ हिंसात्मक कार्य करता है या किसी चिकित्सकीय सेवा संस्था की संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो दोष साबित होने पर उसे एक साल कारावास की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना होगा।

ये जमानती अपराध था। अब नए संशोधन अधिनियम में तीन साल की कैद और इस अपराध को गैर जमानती बनाया जा रहा है। बता दें कि अस्पतालों में बढ़ती मारपीट की घटनाओं और डॉक्टरों की मांग पर सरकार कानून में संशोधन करने जा रही है। इस मांग को लेकर प्रदेश में डॉक्टर कई दिनों तक हड़ताल कर चुके हैं।
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