हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय के बाद पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव का बिगुल बज गया है। प्रदेश के पंचायतीराज चुनाव में इस बार युवा मतदाताओं की मजबूत भागीदारी रहेगी। इन चुनाव में 52,349 नए मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। प्रदेश में कुल 50,79,048 मतदाता इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेंगे और गांव की सरकार चुनेंगे। इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या महिलाओं से अधिक है। जिलावार आंकड़ों में भी बड़ा अंतर है। कांगड़ा जिला 11.90 लाख मतदाताओं के साथ सबसे बड़ा चुनावी जिला है, जबकि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाला लाहौल-स्पीति मात्र 25,882 मतदाताओं के साथ सबसे छोटा जिला है। ग्राम पंचायतों में पांवटा साहिब की भाटावाली पंचायत में सबसे अधिक 4,623 मतदाता हैं, जबकि पूह की पंचायत सुमरा में केवल 178 मतदाता हैं। इतना ही नहीं, भाटावाली के एक वार्ड में 723 मतदाता हैं, जबकि विकास खंड मैहला की पंचायत करियां के वार्ड 8 में सिर्फ 17 मतदाता ही पंजीकृत हैं।
प्रदेश में कुल 21,678 मतदान केंद्र
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुचारु बनाने के लिए प्रदेशभर में 21,678 मतदान केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया है। आयोग ने सभी रिटर्निंग अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो और मतदाताओं को अधिकतम सुविधा मिले। आयोग के निर्देशों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या अधिक है, वहां अतिरिक्त दबाव को कम करने के लिए सहायक मतदान केंद्र (ऑक्जलरी पोलिंग स्टेशन) भी स्थापित किए जाएंगे। इससे मतदान की गति तेज होगी और लंबी कतारों से भी राहत मिलेगी। महिला मतदाताओं की भागीदारी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आयोग ने विशेष व्यवस्था की है। अधिक मतदाता संख्या वाले क्षेत्रों में पुरुष और महिला मतदाताओं के लिए अलग-अलग मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। इतना ही नहीं, महिलाओं के लिए बनाए गए इन केंद्रों पर जहां तक संभव होगा, महिला मतदान दल और महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी, ताकि महिलाए सुरक्षित और सहज वातावरण में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
तीन चरणों में मतदान
राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को चुनावी कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसके साथ प्रदेश में आचार संहिता लग गई है। हिमाचल में तीन चरणों में 26, 28 और 30 मई को जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्य और पंचायत प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्यों के लिए मतदान होगा। जिला निर्वाचन अधिकारी (डीसी) को अपने-अपने जिलों में मतदान तिथियां निर्धारित करने के लिए अधिकृत किया गया है। प्रदेश में 3,754 पंचायतों में कुल 50,79,048 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 25,67,770 पुरुष और 25,11,249 महिलाएं और 29 अन्य मतदाता शामिल हैं। खास बात यह है कि 52,349 युवा पहली बार मतदान करेंगे। चुनाव प्रक्रिया के लिए प्रदेशभर में 21,678 मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें 4587 मीटर की ऊंचाई पर सबसे ऊंचा मतदान केंद्र लाहौल-स्पीति जिले के कौमिक स्कूल में बनाया जाएगा, जो भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में स्थित है।
अलग-अलग रंग के मत पत्र होंगे
जिला परिषद, पंचायत समिति, प्रधान, उपप्रधान व पंचायत सदस्यों के लिए अलग-अलग रंग के मत पत्र होंगे। इन पदों के लिए कुल 60 लाख मतपत्र बनाए गए हैं। रंग अलग-अलग इसलिए तय किए गए हैं ताकि ताकि वोटरों में किसी प्रकार के भ्रम की स्थिति न बने। अशिक्षित लोग पर्ची का रंग देखकर मत का प्रयोग कर सकेंगे। 80 साल से अधिक आयु के बुजुर्ग मतदान केंद्रों में ही मतदान करेंगे।
किस पद के लिए किस रंग का मतपत्र
प्रधान हल्का हरा
उपप्रधान - पीला
सदस्य - सफेद
पंचायत समिति सदस्य - गुलाबी
जिला परिषद सदस्य -हल्का नीला
चुनाव कार्यक्रम की अधिसूचना 29 अप्रैल को जारी होगी
राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त अनिल खाची ने प्रेसवार्ता में पंचायत चुनाव का शेड्यूल जारी करते हुए कहा कि निर्वाचन कार्यक्रम की अधिसूचना 29 अप्रैल को जारी होगी। नामांकन पत्र प्रस्तुत करने की तिथि 7, 8 और 11 मई को होगी। 12 मई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। 14 और 15 मई तक प्रत्याशी अपने नाम वापस ले सकेंगे औ 15 को ही चुनाव चिह्नाें का आवंटन किया जाएगा। पंचायत प्रधान, उपप्रधान और सदस्यों के परिणाम मतदान के दिन उसी शाम को आएंगे जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति के मतों की गणना 31 मई को विकास खंड मुख्यालय में होगी। इसी दिन नतीजे आएंगे। उन्होंने कहा कि चुनावों को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए आयोग ने सभी जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। संवेदनशील और अति-संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष सुरक्षा प्रबंध किए जाएंगे। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उधर, आचार संहिता लगते ही भर्तियां, नियुक्तियां, विकास कार्य और राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होंगे। मंत्री, विधायक अब सरकारी मशीनरियों का भी इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।
इन पदों पर होगा चुनाव
| पद |
कुल संख्या |
| प्रधान |
3754 |
| उपप्रधान |
3754 |
| पंचायत सदस्य |
21,654 |
| पंचायत समिति सदस्य |
1769 |
| जिला परिषद सदस्य |
251 |
| कुल |
31,182 |
कुल्लू जिले की इन चार पंचायतों में नहीं होंगे चुनाव
कुल्लू जिले के नग्गर ब्लॉक की करजां, सोयल और आनी ब्लॉक की जाबन व नम्होल पंचायत में चुनाव नहीं होंगे। इन पंचायतों का कार्यकाल 9 फरवरी 2027 को पूरा होगा। हालांकि, इन पंचायतों में पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के लिए वोट डाले जाएंगे।
जिला परिषद सदस्य के लिए खर्च की सीमा एक लाख
पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में जिला परिषद सदस्य के लिए खर्च की सीमा 1 लाख निर्धारित की गई है जबकि पंचायत समिति, प्रधान, उपप्रधान और सदस्यों के लिए खर्च की कोई सीमा नहीं होगी।
आयोग ने ये आदेश भी जारी किए....
- पंचायतीराज संस्थाओं में 30 से 40 करोड़ आएगा चुनाव का खर्चा
- वन भूमि पर अतिक्रमण, जिन्होंने कब्जा नियमित करने को आवेदन किया है, वह चुनाव लड़ सकेंगे
- सरकारी कर्मचारी नहीं लड़ सकेंगे चुनाव, मुख्यालय भी नहीं छोड़ सकेंगे
- सरकारी कर्मचारी नहीं होगा उम्मीदवार का एजेंट, ऐसा करने पर तीन महीने का कारावास
- चिट्टे में संलिप्त, आरोप तय होने वाले भी नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
- पंचायतों में गंदगी फैलाने पर होगा जुर्माना
- मतदान केंद्रों से 100 मीटर दूरी पर होंगे उम्मीदवारों के शिविर
- शिविर में मतदाताओं को सफेद रंग की पर्ची में देना होगा नंबर
- मतदान केंद्रों के इर्द-गिर्द लाउड स्पीकर की अनुमति नहीं होगी
- सरकारी कर्मचारी मंत्रियों और विधायकों के साथ चुनाव प्रचार में नहीं रहेगा
- उम्मीदवारों के घरों में नहीं ठहरेगी चुनावी टीम
बुजुर्गों को मतदान केंद्रों में ही मतदान करना होगा
हिमाचल प्रदेश में 80 साल से ज्यादा आयु के बुजुर्गों को मतदान केंद्रों में ही मतदान करना होगा। विधानसभा चुनाव के दौरान बुजुर्गों ने घर में वोट डाले थे। राज्य निर्वाचन आयोग का मानना है कि अगर बुजुर्गों से घर में वोट डालवाए जाते हैं तो कर्मचारियों की ज्यादा ड्यूटी लगेगी।
56 हजार कर्मचारी लगेंगे चुनाव ड्यूटी पर
पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में 56 हजार कर्मचारियों की ड्यूटी लगेगी। हर जिले में चुनाव के दौरान कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने का जिम्मा जिला निर्वाचन अधिकारियों को सौंपा गया है। प्रदेश में नए नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतें बनाए जाने से पंचायतों में मतदाताओं की संख्या घटी है। पूर्व में हुए पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में मतदाताओं की संख्या 54 लाख थी, इस बार घटकर 50,79,048 रह गई है।
जिलों में मतदाताओं की संख्या
बिलासपुर – 3,15,340
चम्बा – 4,04,657
हमीरपुर – 3,65,160
कांगड़ा – 11,90,330
किन्नौर – 59,969
कुल्लू – 3,09,995
लाहौल-स्पीति – 25,882
मंडी – 7,95,634
शिमला – 5,08,835
सिरमौर – 3,74,050
सोलन – 3,51,272
ऊना – 3,77,924
कुल मतदाता- 50,79,048
पंचायत चुनाव, बिना पहचान पत्र नहीं डाल सकेंगे वोट, 48 घंटे रहेगा ड्राय डे
राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि मतदान केंद्रों में प्रवेश के लिए पहचान पत्र अनिवार्य होगा और बिना वैध दस्तावेज के किसी को भी मतदान की अनुमति नहीं दी जाएगी। मतदाता सूची में नाम होना जरूरी है और पहचान के लिए फोटो पहचानपत्र लाना होगा। फोटो पहचान पत्र न होने की स्थिति में 16 वैकल्पिक दस्तावेज मान्य किए गए हैं, जिनमें ड्राइविंग लाइसेंस, आयकर पहचान पत्र, सरकारी या प्राइवेट संस्थान का पहचान पत्र, पैन कार्ड, बैंक या डाकघर पासबुक, राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, छात्र पहचान पत्र, शस्त्र लाइसेंस, कंडक्टर लाइसेंस, पेंशन पासबुक, रेलवे, बस पास, अक्षम प्रमाण पत्र, स्वतंत्रता सैनाली प्रमाण पत्र और आधार कार्ड सहित मान्य होगा।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एप लॉन्च
तकनीक के जरिये पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आयोग ने डीपीएमआईएस एप लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से मतदाता अपने क्षेत्र के प्रत्याशियों की पूरी जानकारी, नामांकन, चुनाव चिन्ह, चल-अचल संपत्ति, देनदारियां और आपराधिक पृष्ठभूमि रियल टाइम में देख सकते हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुलिस को विशेष निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान समाप्ति से 48 घंटे पहले से लेकर मतदान और मतगणना तक शराब और अन्य मादक पदार्थों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
मतदान के दिन सभी सरकारी और निजी संस्थानों में सवैतनिक अवकाश घोषित होगा
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं अधिकतम मतदान सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने मतदान के दिन सभी सरकारी और निजी संस्थानों में सवैतनिक अवकाश घोषित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि हर नागरिक बिना किसी बाधा के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके। आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे निर्भीक होकर मतदान करें और अपने साथ वैध पहचान पत्र अवश्य लेकर आएं, ताकि लोकतंत्र के इस महापर्व में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।