हिमाचल हाईकोर्ट ने बंदरों के आतंक के मुद्दे पर कारगर कदम न उठाने पर केंद्र और प्रदेश सरकार को जमकर लताड़ लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारों के लापरवाह रवैये के कारण जानमाल का नुकसान हो रहा है।
शिमला में बंदरों के हमले से महिला की मौत की घटना सरकारों की संवेदनहीनता के कारण घटी है। अदालत ने हैरानी जताते हुए कहा कि यह मामला लंबे समय से विचाराधीन है और बार-बार आदेश पारित किए जाने के बावजूद बंदरों और कुत्तों के आतंक से निपटने के लिए ठोस नीति नहीं बनाई जा सकी।
इस मामले की सुनवाई आगामी 9 दिसंबर के लिए निर्धारित करते हुए मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने कहा कि सरकार को इस मामले में कार्रवाई करने के लिए अंतिम मौका दिया जाता है।
अन्यथा अदालत को कठोर आदेश पारित करने पर मजूबर होना पड़ेगा।