मामला वर्ष 2008 का है, जब लोक सेवा आयोग ने 15 पदों की सिफारिश भेजी थी। सभी औपचारिकताएं 2008 में पूरी होने के बाद भी सरकार ने नियुक्ति पत्र जनवरी 2009 में दिए। इस बीच सरकार ने जेई को पदोन्नत कर सीधे भर्ती वालों को उनसे जूनियर कर दिया था। अदालत ने कहा कि नियमों में 25 फीसदी सीधी भर्ती और 75 फीसदी पदोन्नति का कोटा तय है। तय कोटे से अधिक की गई पदोन्नतियां तदर्थ मानी जाएंगी। जब उम्मीदवार 2008 में उपलब्ध थे, तो सरकारी देरी के कारण उन्हें जूनियर करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का सीधा उल्लंघन है।