सरकार ने कोर्ट को सुनवाई के दौरान बताया कि वन अधिकारियों ने मुस्तैदी से काम करते हुए यह मामला पकड़ा है। अत: इस मामले में पहले से बनाए गए आरोपी वन कर्मियों के सिवाय किसी अन्य की कोताही सामने नहीं आई है।
सरकार के इस वक्तव्य के बाद कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल इस पहलू में पड़ना नहीं चाहते, लेकिन यह देखना जरूरी है कि क्या बड़े वन अधिकारियों को फील्ड इंस्पेक्शन पर नियमित रूप से जाना चाहिए या नहीं।
कोर्ट ने वन विभाग के प्रधान सचिव को निजी शपथपत्र दायर कर यह बताने को कहा कि क्या जरूरी इंस्पेक्शन आला अधिकारियों द्वारा की गई है। कोर्ट ने आला वन अधिकारियों द्वारा की गई इंस्पेक्शन
रिपोर्टों के आधार पर शपथपत्र तैयार करने के आदेश दिए। वन विभाग को पिछले एक वर्ष में सभी वन मंडलों की इंस्पेक्शन आला अधिकारियों द्वारा किये जाने का विस्तृत ब्योरा भी मांगा है।