कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद निर्धारित की है। एमएमयू और उससे संबद्ध मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज कुमारहट्टी के करीब 1200 विद्यार्थियों से 103 करोड़ 96 लाख 53 हजार रुपये की अतिरिक्त ट्यूशन फीस वसूलने का आरोप लगाया गया था।
महर्षि मार्कंडेश्वर विश्वविद्यालय (एमएमयू) के विद्यार्थियों से अतिरिक्त ट्यूशन फीस वसूलने पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से दो हफ्ते के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद निर्धारित की है। एमएमयू और उससे संबद्ध मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज कुमारहट्टी के करीब 1200 विद्यार्थियों से 103 करोड़ 96 लाख 53 हजार रुपये की अतिरिक्त ट्यूशन फीस वसूलने का आरोप लगाया गया था। इस अनियमितता के लिए मार्कंडेश्वर मेडिकल कॉलेज पर निजी शिक्षा नियामक आयोग ने 45 लाख का जुर्माना लगाया था। हालांकि हाईकोर्ट ने 22 जुलाई 2022 को आयोग के इस फैसले पर रोक लगा रखी है। आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया था कि वर्ष 2012 से 2020 की अवधि के दौरान लगभग 1100 एमबीबीएस विद्यार्थियों से 103 करोड़ 96 लाख 53 हजार रुपये की अतिरिक्त ट्यूशन फीस वसूली जा चुकी है।
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एमएमयू की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिमाचल राज्य निजी शिक्षा नियामक आयोग की ओर से पारित आदेशों पर पूर्ण कोरम के हस्ताक्षर नहीं किए गए थे। आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि आयोग के दो सदस्यों में से जिन्होंने इस मामले की सुनवाई की थी, एक सदस्य शशिकांत शर्मा ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए। शशिकांत शर्मा ने हस्ताक्षर से इंकार करते हुए कहा था कि उनकी बेटी भी विश्वविद्यालय में नामांकित थी। गौरतलब है कि वर्ष 2013-14 बैच की एमबीबीएस छात्रा निवेदिता राव व यामिनी ने शिकायत की थी कि शुरू में उन्होंने अतिरिक्त ट्यूशन फीस की वसूली को लेकर विरोध भी किया था। उन्हें यह कहकर धमकाया गया कि फीस न जमा करने पर डिग्री नहीं पूरी होने दी जाएगी। ये भी आरोप लगा था कि एसटी छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति को भी डकार लिया गया था।