हिमाचल सरकार ने सोमवार को इस बात को मान लिया कि ग्राम पंचायतों ने अपनी नासमझी से खुद को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) घोषित करने की गड़बड़ी की। ये भी स्वीकार किया कि जिन पंचायतों ने खुद को ओडीएफ घोषित किया है, उनकी संख्या 1584 है।
राज्य सरकार के स्तर पर इनमें से केवल 984 ग्राम पंचायतें ही ओडीएफ सत्यापित की गई है। जल्द ही एक केंद्रीय टीम भी इसका सत्यापन करेगी। सोमवार को ‘अमर उजाला’ में ‘पुरस्कार के लिए हिमाचल की 600 पंचायतों ने किया फर्जीवाड़ा’ खबर छपने के बाद अधिकारियों में खूब हड़कंप मचा रहा।
ग्रामीण विकास विभाग के संबंधित अधिकारी इस बारे में राज्य सचिवालय में सचिव ग्र्रामीण विकास ओंकार शर्मा के कार्यालय जाकर इसकी सफाई देते रहे। संयुक्त निदेशक एवं उप सचिव ग्रामीण विकास भूपेंद्र कुमार अत्री ने सचिव ग्रामीण विकास को बताया कि भारत सरकार ने आठ अक्तूबर 2016 को एक पत्र भेजा था, जिसमें कहा गया था कि हिमाचल प्रदेश में खुले में शौचमुक्त पंचायतों का सत्यापन किया जाए, जिन्हें ग्राम पंचायतों ने खुद खुले में शौचमुक्त पंचायतें घोषित किया है।
ये छानबीन अभी नौ जिलों में ही पूरी की गई है। इसे बारे में रिपोर्ट को आईएमआईएस पर भी अपलोड किया गया है। कांगड़ा और कुल्लू जिले की रिपोर्ट को भी अपलोड किया जा रहा है। लाहौल स्पीति में भी ये कार्य चल रहा है। 1584 ग्राम पंचायतों ने खुद को खुले में शौच मुक्त घोषित किया था। इनमें से केवल 984 की ही खुले में शौच से मुक्त होने की वेरिफिकेशन की गई है।
राज्य सरकार बची हुई पंचायतों की छानबीन को भी आगामी दिनों में पूरा करेगी। भारत सरकार ने ये स्पष्ट नहीं किया है कि खुले में शौचमुक्त पंचायतों को किस तरह के इंसेंटिव्स दिए जाने हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक खुले में शौच मुक्त घोषित ग्राम पंचायतों की परिभाषा ये होगी कि पर्यावरण और गांवों में खुले में कहीं भी कोई शौच नजर नहीं आना चाहिए।
हर परिवार और हर सामुदायिक संस्थान को शौच के डिस्पोजल की सुरक्षित तकनीक का इस्तेमाल करना जरूरी होगा। जिन ग्राम पंचायतों ने ये सब उपाय नहीं अपनाए हैं, उन्हें छानबीन की प्रक्रिया में खारिज किया गया है। ये भी स्पष्ट किया जाता है कि पंचायती राज संस्थाओं ने ग्राम पंचायतों को ओडीएफ भारत सरकार की गाइडलाइंस को अपनी समझ से लागू करते हुए खुले में शौचमुक्त घोषित किया है।
राज्य की ओर से छानबीन की प्रक्रिया भारत सरकार की गाइडलाइंस को ठीक से फालो करते हुए पूरा किया है। किसी भी पंचायत को निर्मल ग्राम पुरस्कार और महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार छानबीन के बाद ही दिए गए हैं। हालांकि, इन तथ्यों को मंजूर करते हुए उन्होंने ये भी कहा कि इसे फ्राड नहीं माना जाना चाहिए।