हिमाचल में पिछले तीन सालों में बेरोजगारों की फौज खड़ी हो गई है। पिछले तीन साल में छह लाख से अधिक नए बेरोजगार पंजीकृत हुए हैं। हालांकि, प्रदेश के रोजगार केंद्रों से 6,71,274 पंजीकृत बेरोजगारों के नाम काट भी दिए गए हैं। इन्होंने नाम दर्ज होने के बाद पंजीकरण नहीं करवाया, इसलिए इनके नाम काट दिए गए हैं।
तीन साल में सवा छह लाख बेरोजगारों की नई फौज ने बेशक रोजगार केंद्रों में पंजीकरण करवा लिया हो, मगर इस संख्या से ज्यादा बेरोजगारों को रोजगार केंद्रों की सूची से बाहर कर दिया गया है। सरकारी आंकड़े के अनुसार 31 दिसंबर 2012 से लेकर 31 अक्तूबर 2015 तक प्रदेश के विभिन्न रोजगार कार्यालयों में 6,38,946 बेरोजगारों ने अपने नाम दर्ज करवाए हैं। हालांकि, आवेदनों के रिन्यू न होने की स्थिति में रोजगार केंद्रों से 6,71,274 आवेदकों के नाम काट दिए गए हैं।
सरकार ने बताया पूरा आंकड़ा
चिंतपूर्णी के विधायक कुलदीप कुमार के प्रश्न के जवाब में श्रम एवं रोजगार मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि 31 दिसंबर 2007 तक हिमाचल प्रदेश में 7,71,257 बेरोजगार रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत थे। पांच वर्षों में इनकी संख्या में केवल एक लाख की बढ़ोतरी हुई थी। 30 नवंबर 2012 तक रोजगार कार्यालयों के पंजीकरण रजिस्टर में कुल 8,65,611 नाम दर्ज थे।
वहीं 31 दिसंबर 2012 से 31 अक्तूबर 2015 तक छह लाख से अधिक बेरोजगारों ने अपने नाम पंजीकृत करवाए थे। मंत्री ने बताया कि नियमानुसार पंजीकृत आवेदकों के दोबारा पंजीकरण न करवाने और नौकरी लगने के कारण उनका नाम पंजीकरण रजिस्टर से काट दिया गया है।
नियामानुसार काटे गए बेरोजगारों के नाम
नियमानुसार पंजीकृत आवेदकों के दोबारा पंजीकरण न करवाने और नौकरी लगने के कारण उनका नाम पंजीकरण रजिस्टर से काट दिया गया है। सरकारी आंकड़े के अनुसार 31 दिसंबर 2012 से लेकर 31 अक्तूबर 2015 तक प्रदेश के विभिन्न रोजगार कार्यालयों में 6,38,946 बेरोजगारों ने अपने नाम दर्ज करवाए हैं।