बंदरों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग को लेकर आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्ताव लाया जाएगा। 1978 में केंद्र सरकार ने बंदरों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद प्रदेश सरकारों ने कई बार केंद्र को प्रस्ताव भेजे लेकिन मंजूर नहीं है।
एक बार फिर से सरकार बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके कारण हो रहे नुकसान को देखते हुए इस मसले को विधानसभा में लाने का निर्णय किया है। हिमाचल प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया ने कहा कि प्रदेश सरकार बंदरों के उत्पात से निपटने के लिए प्रभावी पग उठा रही है और इससे निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई जा रही है ताकि फसलों को उनके नुकसान से बचाने के साथ-साथ आम लोगों को भी जंगली जानवरों के भय से निजात दिलाई जा सके।
पठानिया ने कहा कि वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने विश्वास दिलाया है कि राज्य सरकार आगामी विधानसभा सत्र के दौरान बंदरों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को उठाने के लिए प्रस्ताव लाएगी, जिसे भारत सरकार से स्वीकृति के लिए प्रेषित किया जाएगा। इससे प्रदेश के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हाल ही में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बंदरों के उत्पात से चिंतित है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने बंदरों द्वारा किए जा रहे उत्पातों पर नजर रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप विस्तृत पग उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्थापित सात बंदर बंधीयकरण केंद्रों के माध्यम से 85 हजार से अधिक बंदरों का बंधीकरण किया गया है और इस कार्यक्रम को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी चलाया जा रहा है।
प्रदेश सरकार किसानों की कृषि भूमि को कंटीली तारों से कवर करने की संभावनाओं का पता लगा रही है ताकि कृषि उत्पादों को जंगली जानवरों से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने उच्च मार्गों के किनारों पर बंदरों तथा अन्य जानवरों को खाद्य सामग्री न देने के लिए सूचना पट्ट भी स्थापित किए।