मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के विफल होने के बाद अब सरकारी विभागों ने उनमें बदलाव कर लागू करने की कवायद शुरू की है। ताजा मामला कृषि विभाग से जुड़ी मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना का सामने आया है।
बजट घोषणा के तहत इस योजना में खेतों और बागों को लावारिस व जंगली पशुओं के हमले और नुकसान से बचाने के लिए विद्युत या सौर ऊर्जा वाली बाड़ लगाने पर सरकार द्वारा किसान बागवान को लागत का साठ प्रतिशत वित्तीय सहायता देने की व्यवस्था की गई थी।
लेकिन योजना लागू होने के बाद से अब तक एक भी किसान या बागवान ने वित्तीय सहायता लेने के लिए आवेदन ही नहीं किया। चूंकि मुख्यमंत्री ने खुद बजट में इस योजना का एलान किया था। इसलिए विभाग ने अब इस योजना को सफल बनाने के लिए नए सिरे से कवायद शुरू की है।
इसके तहत अब कृषि अधिकारी गांवों में जाकर किसानों बागवानों को संयुक्त रूप से बाड़ लगाने के लिए प्रेरित करेंगे। ऐसा होने से ज्यादा इलाका कम लागत में सुरक्षित हो सकेगा। इसके लिए पंचायत स्तर पर किसानों के साथ बैठक करने की तैयारी है।