हिमाचल के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजय गुप्ता के खिलाफ पाइप खरीद मामले में भ्रष्टाचार का मुकदमा नहीं चलेगा। मौजूदा सरकार उन पर लगे आरोपों से सहमत नहीं है। 20 साल पहले संजय गुप्ता और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज इस मामले में अभियोजन मंजूरी देने से प्रदेश सरकार ने इंकार कर दिया है।
साथ ही उनके खिलाफ जांच की फाइल बंद करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में अब अन्य आरोपियों पर ही केस चलेगा। संजय गुप्ता वर्तमान में प्रधान सचिव परिवहन और तकनीकी शिक्षा के पद पर तैनात हैं। उनके खिलाफ वर्ष 1996 में विजिलेंस केस दर्ज हुआ था। इस मामले में सीआईडी भी जांच कर एक बार कैंसलेशन रिपोर्ट बना चुकी है।
संजय गुप्ता नब्बे के दशक के शुरू में किन्नौर में एडीसी के पद पर तैनात थे। उनके पास उस समय डेजर्ट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का भी कार्यभार था। इस परियोजना के तहत तब उच्च घनत्व वाली पानी की पाइपों की खरीद की गई। आरोप है कि इस खरीद में अनियमितताएं बरती गई हैं।
आईएएस पर लगे हैं ये आरोप
डीसी की अध्यक्षता में बनी पर्चेज कमेटी की मंजूरी की औपचारिकताओं को पूरा किए बगैर ही ये खरीद की गई। ये पाइपें लगभग 85 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए खरीदी गईं, जबकि तय सीमा करीब 45 हेक्टेयर की थी। इस खरीद-फरोख्त से सरकारी कोष को लाखों रुपये के नुकसान की बात सामने आई थी। जिन पाइपों की सोलन की एक फर्म से खरीद की गई, उन्हें भी अच्छी गुणवत्ता का नहीं बताया गया।
इसके बाद विजिलेंस के शिमला थाने में वर्ष 1996 में एफआईआर दर्ज की गई। इसमें संजय गुप्ता को कुछ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ आरोपी नामजद किया गया। इस मामले की छानबीन एक बार सीआईडी को भी दी जा चुकी है। सीआईडी ने इस पर कैंसलेशन रिपोर्ट बनाई थी, मगर कुछ साल पहले इस मामले की जांच विजिलेंस में दोबारा खोल दी थी। अब जांच के पूरा होने के बाद विजिलेंस ने सरकार से मुकदमे की मंजूरी मांगी थी।
विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में अभियोजन मंजूरी मांगी थी। सरकार ने आईएएस अधिकारी संजय गुप्ता के खिलाफ मंजूरी से इंकार किया है। अब संजय गुप्ता के खिलाफ मुकदमा नहीं चलेगा।- एसबी नेगी, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, विजिलेंस ब्यूरो।