कोविड के दौरान दो वर्ष कोविड के बीच फूल उत्पादकों को करोड़ों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। इस वर्ष उत्पादकों को घाटे से उभरने की उम्मीद मिली है। सोलन के डांगरी, घट्टी और चायल क्षेत्र में फूल की पैदावार तैयार है, लेकिन प्रदेश की एकमात्र परवाणू फूल मंडी में अभी तक आढ़ती ही नहीं पहुंचे हैं।
इस कारण उत्पादकों को चंडीगढ़ और दिल्ली फूल भेजने को मजबूर होना पड़ रहा है। दिल्ली में जिले का कारनेशन फूल 200 से 250 रुपये प्रति बंच बिक रहा है। एक बंच में 20 फूल होते है। दामों को लेकर उत्पादक खुश हैं, लेकिन चंडीगढ़ और दिल्ली फूल पहुंचने में अधिक खर्चा हो रहा है। परवाणू मंडी शुरू होने से खर्चा भी कम होगा।
कोविड के बीच लॉकडाउन के कारण करोड़ों रुपये के फूल पशुओं का चारा बन गए थे। सोलन का फूल चंडीगढ़, दिल्ली की मंडी तक पहुंचाया जा रहा है। सोलन का चायल क्षेत्र फूलों की खेती के लिए काफी मशहूर है। यहां लोग बड़ी संख्या में गुलाब, कारनेशन, गेंदा, बेला जैसे फूलों की खेती करते हैं।
इस बार अप्रैल माह में शादी के सीजन से फूल उत्पादकों को अच्छे कारोबार की उम्मीद है। चायल के फूल उत्पादक दिनेश कुमार, अशोक वर्मा, गगनदीप, सुशील वर्मा, विकुल वर्मा संजीव कुमार सुनील ने कहा कि फूल तैयार है, जिसे दिल्ली भेजा रहा है। परवाणू मंडी अभी तक शुरू नहीं हुई है।
उधर, मंडी समिति सोलन के सचिव डॉ. रविंद्र शर्मा ने बताया कि मई माह से परवाणू मंडी में फूलों का कारोबार शुरू किया जाएगा। इसके लिए दस दुकानों का आवंटन किया गया है। जिससे प्रदेश के फूल उत्पादकों को बेहतरीन सुविधा मिलेगी। मई माह से फूल भी रश पर चलना शुरू हो जाएगा।