वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों समेत लोग जिक्र करते थे कि उन्होंने लाहौल घाटी के तिंदी व मयाड़ में दुर्लभ प्रजाति का हिमालयन गोरल होने की बातें सुनी थीं। लेकिन अब शोधकर्ताओं की तस्वीरों से यह पता चल रहा है कि यहां किस-किस वन रेंज में यह जीव है।
वन्य जीव व पक्षियों पर शोध कर रहे शोधार्थी अमीर जस्पा ने लाहौल की पट्टन घाटी में पहली बार हिमालयन गोरल को अपने कैमरे में कैद किया है। इससे साफ हो गया कि दुर्लभ प्रजाति का हिमालयन गोरल पट्टन में भी पाया जाता है। इससे पहले भी वन विभाग के वरिष्ठ वन रक्षक एवं शोधार्थी शिव कुमार और लोनिवि के कर्मचारी अमीर जस्पा ने उदयपुर वनमंडल में हिमालयन गोरल की तस्वीर लेकर उस क्षेत्र में इस वन्य जीव के होने के पुख्ता सबूत दिए थे।
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वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों समेत लोग जिक्र करते थे कि उन्होंने लाहौल घाटी के तिंदी व मयाड़ में दुर्लभ प्रजाति का हिमालयन गोरल होने की बातें सुनी थीं। लेकिन अब शोधकर्ताओं की तस्वीरों से यह पता चल रहा है कि यहां किस-किस वन रेंज में यह जीव है। जनजातीय क्षेत्र पांगी के साथ लाहौल के जंगलों में कई प्रजाति के वन्य जीवों एवं पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों को शोधकर्ताओं ने अपने कैमरे में कैद कर इनके पुख्ता प्रमाण दिए हैं।
लाहौल में वन विभाग की केलांग, उदयपुर, तिंदी और पट्टन वन रेंज जाहलमा है। अब उदयपुर और तिंदी के बाद पट्टन वन रेंज में भी हिमालयन गोरल होने का पुख्ता प्रमाण मिला है। अमीर जस्पा ने कहा कि उन्होंने इससे पहले भी तिंदी व उदयपुर वन रेंज में भी हिमालयन गोरल को अपने कैमरे में कैद किया है। इस संबंध में वन मंडलाधिकारी लाहौल दिनेश शर्मा ने कहा कि पट्टन वन रेंज में पहली बार हिमालयन गोरल कैमरे में कैद होने से पुख्ता प्रमाण मिले हैं।