जर्जर मकान में रहने को मजबूर सोनम आंगमो।
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जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति में 46 वर्षीय असहाय महिला पुराने जर्जर मकान में रहने को मजबूर है। महिला आर्थिक तौर पर कमजोर है और परिवार में भी कोई सदस्य नहीं है। महिला को सरकार व प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है। 46 वर्षीय महिला सोनम आंगमो के रहन-सहन को देखकर दिल पसीज जाता है। इस दुनिया में न तो उनके माता-पिता हैं न भाई-बहन।
भाई लगभग 18 वर्ष पहले एक सड़क दुर्घटना में दुनिया से रुखसत हो गए। पहले से ही नाना-नानी के घर में शरण लिए सोनम आंगमो को नाना-नानी की मौत के बाद वह मामा दोंडुप टशी के साथ रहीं। सात साल पहले मामा भी इस दुनिया में नहीं रहे। तब से लेकर वह केलांग से सात किमी दूर जम्बा गोंपा बार गांव में एक बीरान मकान में अकेली रह रही हैं। नाना-नानी का घर भी अब खंडहर में तबदील होने लगा है। मकान की एक दीवार गिर गई है छत भी टूट गई। ऐसे में अब जर्जर मकान बारिश और बर्फबारी में कभी भी ढह सकता है। स्थानीय लोग व कई सामाजिक संगठन महिला की मदद को आगे आ रहे हैं। वहीं महिला को एकल नारी पेंशन सुविधा मिल रही है, बीपीएल में भी है। मगर इस महिला के पास न तो घर है न ही जमीन है।
लाहौल घाटी के जम्बा गोंपा बार गांव के जिस घर में महिला रह रही है वह घर भी सरकारी जमीन पर बना हुआ बताया जा रहा है। मकान अब पूरी तरह से तहस नहस हो गया है। बुधवार को अमर उजाला गांव जाकर महिला के घर पहुंचा और अकेली महिला की तकलीफों को जाना। स्थानीय पंचायत प्रधान विजय आनंद तथा वाईडीए गरशा के छिमेद दोरजे ने बताया कि युवा मंडल गुमरंग, स्तींगरी, तीर अंदाजी क्लब यूरनाथ, वाईडीए गरशा के सदस्यों ने जिस पुराने घर में सोनम आंगमो रह रही थी उस घर की हालात को देखते हुए सोनम आंगमो को डेढ़ दशक पूर्व एक सरकारी आवास योजना में बनाए एक कमरे के मकान में ठहराया गया है।
प्रधान आनंद ने बताया कि उस कमरे की हालात भी ठीक न होने पर क्लब के सदस्यों ने कमरे को ठीक किया। कहा कि सोनम आंगमो की मदद के लिए वह उपायुक्त लाहौल-स्पीति से मिलेंगे। उपायुक्त लाहौल-स्पीति नीरज कुमार ने कहा कि जहां महिला रह रही है वह सरकारी जमीन है। लेकिन प्रशासन जहां महिला को बसाना चाहा रहा है वह वहां रहना नहीं चाहती है।