साल 1998 में धर्मशाला महाविद्यालय में प्रवेश पाया। वहीं से संगीत की भी शुरुआत हुई। इसके बाद 2000 में ऑल इंडिया रेडियो का ऑडिशन दिया, जिसमें सफलता मिली।
वहीं कॉलेज की पढ़ाई के बाद दो साल प्राइवेट नौकरी की।
हालांकि, साल 2005 से 2018 तक गद्दी ऐंचली की लोक रामायण, परंपरा, प्रथा, हुसन पहाड़ां दा, महक माटी की, गद्दी विरासत और शिव विवाह जैसी एलबम मार्केट में आईं। लेकिन, इससे घर नहीं चल सकता था। इसलिए अभी भी गायकी के साथ इंश्योरेंस सेक्टर में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके गुरु रहे डॉ. सतीश ठाकुर, पंडित सुरेश लंघा और सुरेश कपूर का उन्हें हमेशा सहयोग मिला है।
सुनील राणा के जीवन पर अब तक चार डॉक्यूमेंटरी फिल्में बनी हैं, जिसमें एक का प्रसारण सिंगापुर में भी हुआ। इसके बाद सुनील को सिंगापुर में लाइव परफारमेंस के लिए आमंत्रित किया गया था। वहीं सुनील राणा पहले हिमाचल के लोक कलाकार हैं, जिन्होंने टेडेक्स टॉक किया है।
राणा का मानना है कि सरकार लोक संस्कृति के संरक्षण की बात करती है। लेकिन, कलाकारों का संरक्षण किसी ने नहीं किया। यदि कलाकारों का संरक्षण होगा, तो संस्कृति स्वयं ही संरक्षित हो जाएगी।