संरक्षण के आदेश अधिकतम तीन माह के लिए जारी होंगे। इसके बाद समीक्षा कर जरूरत के अनुसार अवधि बढ़ाई जा सकेगी। योजना के तहत गवाहों की सुरक्षा केवल पुलिस तैनाती तक सीमित नहीं रहेगी। जरूरत के अनुसार घर और आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाने, फोन नंबर बदलने और बुलेटप्रूफ सुरक्षा देने जैसे उपाय किए जा सकेंगे। अदालत में गवाही के दौरान आरोपी से आमना-सामना रोकने और संवेदनशील मामलों में बंद कमरे में सुनवाई (इन-कैमरा ट्रायल) की व्यवस्था भी होगी। खतरा अधिक होने पर गवाह की पहचान बदलने और उसे दूसरे सुरक्षित स्थान पर बसाने का प्रावधान है।
इन व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च के लिए राज्य स्तर पर साक्षी संरक्षण कोष बनाया जाएगा। योजना का दुरुपयोग करने वालों पर भी कार्रवाई होगी। झूठी शिकायत देकर सुरक्षा का लाभ लेने वालों से खर्च की वसूली भू-राजस्व के बकाया की तरह की जाएगी। प्रदेश में आपराधिक मामलों की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने और गवाहों को निर्भय होकर बयान देने का माहौल उपलब्ध कराने के लिए गृह विभाग ने साक्षी संरक्षण योजना अधिसूचित की है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 398 के तहत लागू इस योजना को प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसका उद्देश्य गवाहों को अपराधियों की धमकियों, दबाव और किसी भी तरह के नुकसान से बचाना है। खासकर गंभीर आपराधिक मामलों में गवाही देने वाले लोगों को इस योजना के तहत सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
मृत्युदंड, आजीवन कारावास और सात साल या उससे अधिक सजा वाले गंभीर अपराधों के अलावा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों में भी गवाहों को संरक्षण मिलेगा।
गवाहों के संरक्षण के लिए प्रत्येक जिले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में सक्षम प्राधिकरण यानी स्थायी समिति गठित होगी। इसमें पुलिस अधीक्षक या पुलिस उप अधीक्षक सदस्य और जिला न्यायवादी सदस्य सचिव होंगे। समिति सुरक्षा आवेदनों पर विचार कर निर्णय लेगी।