सेटिंग के बाद पौधों से सेब झड़ने के कारण बागवानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश, तूफान और ओलावृष्टि के कारण फसल पर बुरा असर पड़ रहा है। शिमला जिले के अधिकतर सेब उत्पादक क्षेत्रों में सेटिंग के बाद पौधे से सेब झड़ने की समस्या पेश आ रही है। शिमला जिले के ठियोग, कोटखाई, जुब्बल, रोहड़ू, नारकंडा, शिलारू, मतियाना और मड़ावग में बगीचों में फ्रूट ड्रॉपिंग की समस्या आ रही है।
कोटखाई के बागवान नरेंद्र चौहान, सुशील शर्मा और पंकज चौहान का कहना है कि सेटिंग के बाद पौधों से सेब झड़ने लगे हैं। अगर यही स्थिति रही तो पेड़ खाली हो सकते हैं। प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि परागण प्रक्रिया के दौरान बारिश के कारण भी कई सेब उत्पादक क्षेत्रों में फ्रूट ड्रॉपिंग की समस्या पेश आ रही है।
पिंक बड पर बोरोन की स्प्रे के जरिये समस्या से बचा जा सकता है। बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. देशराज ठाकुर का कहना है कि हाई फ्रूट सेटिंग में फ्रूट ड्रॉपिंग एक सामान्य प्रक्रिया है। एक बीमे में पांच छह में से तीन चार फल गिर जाए तो चिंता की बात नहीं है, लेकिन पूरा बीमा ही खाली हो जाए, तो यह गंभीर है।