इस प्रकरण में तत्कालीन चीफ इंजीनियर ऑपरेशन राजेश कुमार ठाकुर, अधीक्षण अभियंता अनूप धीमान और चीफ इंजीनियर कामर्शियल वाईआर शर्मा के अलावा कंपनी निदेशक अभिनव मोदगिल और उमेश मोदगिल नामजद हैं। विजिलेंस अब सभी पहलुओं की जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस स्तर पर नियमों से समझौता हुआ और किसकी जिम्मेदारी बनती है। जानकारी के मुताबिक, बिजली बोर्ड चेयरमैन संजय गुप्ता ने मार्च में एसीएस गृह को इस मामले में शिकायत पत्र सौंपा था और विजिलेंस जांच की मांग उठाई थी। प्रारंभिक छानबीन में गड़बड़ी सामने आने पर अब विजिलेंस ने मामले में एफआईआर दर्ज की है। मामला सोलन जिले के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी की मैसर्स गिलवर्ट इस्पात प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से जुड़ा है। आरोप है कि कंपनी ने बिजली उपयोग के बाद 11.84 करोड़ रुपये तक का बिल समय पर नहीं चुकाया। पहले किस्तों में भुगतान की व्यवस्था हुई, लेकिन चेक बाउंस होने और किस्तों के अटकने से बकाया राशि लगातार बढ़ती गई और कंपनी डिफाल्टर हो गई।