प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद बल्क ड्रग पार्क का प्रारंभिक कार्य कछुआ गति से आगे बढ़ रहा है। दो सप्ताह में पंजीकृत होने वाली कंपनी का पंजीकरण अभी तक नहीं हो पाया है। हालांकि, इसमें तकनीकी खामी का हवाला दिया जा रहा है। बीते विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के बीच जिला ऊना के हरोली स्थित पोलियांबीत में स्थापित होने वाले बल्क ड्रग पार्क के लिए केंद्र ने प्रारंभिक राशि मंजूर करवाने की अनुमति चुनाव आयोग से ली थी।
फिलहाल उद्योग विभाग ने हिमाचल प्रदेश बल्क ड्रग पार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी का नामकरण कर लिया है। इसमें पदाधिकारियों का चयन भी हो चुका है। बात इसे केंद्रीय मंत्रालय के समक्ष पंजीकृत करने की है। पंजीकरण की राह में रोड़ा साइट में तकनीकी खराबी बन रही है। बेशक, आने वाले चंद दिनों में यह पंजीकरण हो भी जाए, लेकिन जिस प्रकार चुनाव से पूर्व इस प्रोजेक्ट को लेकर गतिविधियां तेज गति से आगे बढ़ रहीं थीं, अब ऐसा नहीं है। बल्क ड्रग पार्क के लिए जारी होने वाली प्रारंभिक 300 करोड़ की राशि लटकती हुई नजर आ रही है।
1405 एकड़ में प्रस्तावित है प्रोजेक्ट
बल्क ड्रग पार्क पोलियांबीत में चिह्नित की गई 1405 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित है। इसके लिए 1923 करोड़ की लागत आएगी। कुल भूमि के 60 प्रतिशत हिस्से में दवा उद्योग स्थापित किए जाएंगे। चुनाव से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऊना आकर इस बड़ी योजना का शिलान्यास कर चुके हैं। इसके बाद इसके कार्य को लेकर गति मिली, लेकिन अब सब कुछ धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।
पंजीकरण साइट में तकनीकी खामी के चलते बल्क ड्रग पार्क कंपनी पंजीकृत नहीं हो पाई है। जल्द इसे पंजीकृत कर लिया जाएगा। विभागीय स्तर पर इसके लिए औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।
- राकेश कुमार प्रजापति, निदेशक, उद्योग विभाग