किसानों की आय दोगुनी करना तो दूर, उन्हें अनुदान राशि लेने के लिए ही जूते घिसने पड़ रहे हैं। दरअसल राजकोष विभाग किसानों की करोड़ों रुपये की अनुदान राशि पर कुंडली मारे बैठा है। बागवानी विभाग ने विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों की ओर से खरीदे उपकरणों के बिल करीब छह महीने पहले ही राजकोष विभाग को भेजे थे, लेकिन विभाग के सुस्त रवैये के कारण वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले किसानों की अनुदान राशि का भुगतान नहीं किया गया। अब ऐसे में प्रदेश के सैकड़ों बागवानों व किसानों के करीब दस करोड़ की अनुदान राशि लैप्स हो गई। अकेले जिला ऊना के 67 किसानों की 23 लाख रुपये के अनुदान राशि राजकोष की सुस्त रवैये के कारण अटक गई है। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब बजट का प्रावधान भी था तो किसानों को अनुदान राशि क्यों जारी नहीं की गई। राज्य सरकार की बागवानों के लिए चलाई जा रही योजनाएं राजकोष आधारित हैं। इन योजनाओं की अनुदान राशि राजकोष विभाग सीधे आवेदन करने वाले किसानों के बैंक खाते में डालता है। वित्त वर्ष 2025-26 में आवेदन करने वाले कई किसानों की अनुदान राशि को रोक कर रखा।
किसानों की अनुदान राशि के बिलों को समय पर राजकोष विभाग के पास भेज दिया था। अब नए वित्त वर्ष में रुकी हुई अनुदान राशि को मुहैया करवाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। डॉ. सतीश शर्मा, निदेशक, बागवानी विभाग