हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को जल्द एक ज्ञापन दिया जाएगा। यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलन से भी गुरेज नहीं किया जाएगा। संघ ने शिक्षा विभाग में तरह-तरह की नियुक्तियां की हैं।
विभाग में लंबे समय से नियमित नियुक्तियों के बदले अनुबंध आधार पर नियुक्तियां हो रही हैं। शुरू में अनुबंध शिक्षकों का कार्यकाल आठ साल और बाद में इसे छह साल किया गया। छह साल का कार्यकाल भाजपा शासनकाल में हो गया था। उस समय कांग्रेस पार्टी सत्ता में नहीं थी।
उस समय कांग्रेस के नेताओं ने आश्वासन दिया था कि इसे घटाकर पांच साल कर दिया जाएगा। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में भी इसे पांच साल करने की मांग की थी, मगर सरकार के दो साल पूरा होने पर भी यह वादा पूरा नहीं हो सका है।
सरकार कर रही अनदेखी
वीरेंद्र चौहान ने कहा कि यह एक ज्वलंत मुद्दा है। कहा कि प्रदेश में अनुबंध शिक्षकों की एक बड़ी संख्या हो गई है। इन शिक्षकों का सरकार शोषण कर रही है। यदि कमीशन पास करने के बादभी सम्मानजनक एवं नियमित सेवाकाल न मिले तो व्यक्ति विशेष में एक निराशा सी हो जाती है।
सरकार ने 2010 के बाद की नियुक्तियों में प्रवक्ताओं का पदनाम हटाकर पीजीटी कर दिया है। एक तरफ कॉलेजों में पदनाम लेक्चरर से बढ़ाकर सहायक आचार्य बनाया गया है। दूसरी तरफ स्कूल लेक्चरर का घटाकर पीजीटी किया गया है। यह सही नहीं है। यह शिक्षकों के सम्मान के साथ खिलवाड़ है।
ये हैं प्रमुख मांगें
अनुबंध कार्यकाल को पांच वर्ष करने, पांच साल पूरा होने की तिथि से नियमित करने, हर वर्ष अनुबंध का नवीकरण करने, बैच आधार कांट्रेक्ट को पांच साल में नियमित करने, अनुबंध कर्मचारियों की एसीआर भरने, वेतन वृद्धि को फिक्स न होकर तीन प्रतिशत करने, नियमितीकरण पर वेतन वृद्धि को बहाल करने और पीजीटी पदनाम हटाना।