अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि आदेश का प्रतिवादी की ओर से पालन नहीं किया जाता है, तो इसे अवमानना माना जाएगा और इसके परिणाम भुगतने होंगे। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिवादी इस मुकदमे को गंभीरता से नहीं ले रहा है। मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। गौरतलब है कि कोविडकाल में विदेशों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को भारत सरकार की अधिसूचना के तहत एक या दो साल की इंटर्नशिप के लिए ऑनलाइन क्लासेज जरूरी की गई थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने एक साल की ऑनलाइन क्लासेज पूरी कर दी है, लेकिन हिमाचल प्रदेश स्टेट मेडिकल काउंसिल ने उसे खारिज कर दिया है। राज्य सरकार की ओर से बताया कि इंटर्नशिप की अवधि इस बात पर निर्भर करती है कि छात्रों ने विदेश में एमबीबीएस की कक्षाओं में वास्तव में कितने समय तक भौतिक रूप से भाग लिया था। याचिकाकर्ता 2018-2023 सत्र के छात्र थे और फरवरी 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण भारत लौट आए थे। वे फरवरी 2023 में भारत से वापस गए और जुलाई 2023 में एमबीबीएस पूरी की। इसका मतलब है कि उन्होंने लगभग तीन साल तक भारत में रहकर ऑनलाइन कक्षाएं लीं। इसी कारण से प्रतिवादियों ने उनकी इंटर्नशिप अवधि को एक साल से बढ़ाकर दो साल करने का निर्णय लिया है।