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हिमाचल: मेडिकल कालेज में डॉक्टरों की भर्ती आचार संहिता के फेर में फंसी, 54 स्पेशलिस्ट की होनी है तैनाती

Sat, 02 May 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने की प्रक्रिया आचार संहिता के चलते अटक गई है। 
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डॉक्टर(सांकेतिक)। - फोटो : adobestock
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने की प्रक्रिया आचार संहिता के चलते अटक गई है। राज्य सरकार ने नाहन, नेरचौक (मंडी), हमीरपुर और चंबा मेडिकल कॉलेजों में सेवानिवृत्त प्रोफेसरों की भर्ती का निर्णय लिया है, लेकिन चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण इस प्रक्रिया में देरी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन चारों मेडिकल कॉलेजों में विभिन्न विषयों के करीब 54 स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की तैनाती की जानी है। यह भर्ती लोक सेवा आयोग के माध्यम से की जानी प्रस्तावित है।

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सरकार का उद्देश्य मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ सेवाओं को मजबूत करना और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। कई विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं, जिससे न केवल मरीजों को परेशानी हो रही है, बल्कि मेडिकल छात्रों की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है। विशेष रूप से सुपर स्पेशलिटी और क्लीनिकल विषयों में फैकल्टी की कमी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
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सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए सेवानिवृत्त प्रोफेसरों और अनुभवी डॉक्टरों को अनुबंध आधार पर नियुक्त करने का फैसला लिया है। इससे तत्काल प्रभाव से खाली पदों को भरा जा सकेगा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। हालांकि, आचार संहिता लागू होने के कारण नई भर्तियों से संबंधित फैसलों पर चुनाव आयोग की अनुमति जरूरी हो गई है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आचार संहिता के बीच सरकार को कब तक अनुमति मिलती है।
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