जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर (फाइल फोटो)
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हिमाचल प्रदेश में एक बोर्ड और 11 निगम घाटे में चल रहे हैं। मंगलवार को विधानसभा सदन में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी के सवाल पर मुख्यमंत्री की जगह जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने यह जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ये निगम-बोर्ड कई वर्षों से घाटे में हैं। इस दौरान कई पार्टियों की सरकारें आई और गई हैं। कार्यकर्ताओं को एडजस्ट करने और राजनीतिक मजबूरी के चलते इन्हें बंद नहीं किया जा सकता है। यह प्रथा पुरानी है। यह जारी ही रहेगी।
महेंद्र सिंह ने कहा कि हम भी जब विपक्ष में होते थे तो इनका विरोध करते थे। कांग्रेस सरकार के समय छह निगम-बोर्ड अध्यक्ष थे। भाजपा सरकार ने पांच लगाए हैं। कोरोना संकट के दौरान जिस प्रकार विधायकों और मंत्रियों का तीस फीसदी वेतन कम किया गया, उसी तरह निगमों-बोर्डों के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों का वेतन भी कम किया गया। निगमों-बोर्डों का घाटे में जाना चिंताजनक है। कुछ निगम-बोर्ड पहले लाभ में थे, अब घाटे में चले गए हैं। सरकार दोबारा इन्हें लाभ की स्थिति में लाने के लिए प्रयासरत है। उधर, कांग्रेस विधायक जगत सिंह ने कहा कि यह बीमारी लंबे समय से है। इसे ठीक करना होगा। जिस निगम-बोर्ड का अध्यक्ष मंत्री है, वहां उपाध्यक्ष का पद समाप्त करना चाहिए।
ये निगम-बोर्ड हैं घाटे में
निगम-बोर्ड 31 मार्च 2020 तक सकल घाटा (लाख रुपये में)
राज्य पर्यटन विकास निगम 5032
राज्य ऊर्जा निगम 36199
एससी, एसटी विकास निगम सोलन 2623
अल्पसंख्यक वर्ग वित्त विकास निगम 619
बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण 8509
वन विकास निगम 11042
हिमाचल पथ परिवहन निगम 153370
प्रदेश वित्तीय निगम 15348
एग्रो इंडस्ट्रीज निगम 936
ऊर्जा संचार निगम 10836
हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम 1343
राज्य बिजली बोर्ड 152059