एचपीयू की कार्यकारिणी परिषद की बैठक।
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च्वॉयस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के बैच में स्नातक (यूजी) की पढ़ाई करने वाले छात्रों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के आदेशानुसार एक फीसदी कृपांक मिलेंगे। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला यह लाभ 2013 के बाद वाले विद्यार्थियों को देगा। वहीं, स्नातकोत्तर (पीजी) में रिअपीयर के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों की फीस घटाई जाएगी। फीस कितनी घटेगी, एचपीयू इस पर जल्द स्थिति स्पष्ट करेगा।
बुधवार को कुलपति प्रो. एसपी बंसल की अध्यक्षता में एचपीयू की कार्यकारिणी परिषद की बैठक में ये निर्णय लिए गए। इससे प्रदेश के हजारों विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। एचपीयू में चीन की भाषा में डिप्लोमा कोर्स शुरू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। परिषद ने छात्र संगठनों की मांग पर निर्णय लिया कि अब पीजी के छात्रों से छात्रावास की कोरोना काल के दौरान की आधी ही फीस ली जाएगी।
बैठक में पूर्व कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार के कार्यकाल के अंतिम दिनों में विवादित आउटसोर्स पर भर्ती हुए 135 कर्मचारियों को 31 जुलाई तक वेतन जारी करने का निर्णय लिया गया। आगे इस मामले को वित्त समिति की बैठक में ले जाया जाएगा। हालांकि एचपीयू ऑर्डिनेंस में शामिल 28(ए) के तहत वित्त संबंधी मामलों की पहले वित्त समिति से मंजूरी लेना अनिवार्य होता है, इसके बिना भुगतान नहीं किया जा सकता। पूर्व कुलपति के कार्यकाल में हुए शिक्षकों के तबादले यथावत रहेंगे। एचपीयू में सत्र 2022-23 से ही स्नातकोत्तर डिग्री कोर्स में सीबीसीएस लागू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।
परीक्षा के आधार पर होगा पीएचडी में प्रवेश
ईसी ने एकेडमिक काउंसिल की स्थायी समिति की बीते रोज हुई बैठक में परीक्षा के आधार पर ही पीएचडी में प्रवेश देने के लिए फैसले को स्वीकृति दी। प्रवेश के लिए नियमों को पारदर्शी बनाया जाएगा। ईसी ने एमफिल, एलएलएम, एमटेक और पीएचडी के छात्रों को अपना शोध कार्य बिना किसी विलंब शुल्क के दिसंबर 2022 तक पूरा कर प्रस्तुत करने का समय देने के प्रस्ताव को स्वीकार किया है।