संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान
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किसान बागवानों के हितों के लिए संघर्ष कर रहे संयुक्त किसान मंच ने जवाब दो सरकार अभियान में प्रदेश पूछा है कि बागवानों को एमआईएस का पैसा कब मिलेगा। विधानसभा में सरकार ने एमआईएस के पैसे का भुगतान करने के लिए 20 करोड़ जारी करने का दावा किया है। अगर यह पैसा जारी हुआ है तो बागवानों को क्यों नहीं मिला, सरकार इसका जवाब दे।
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने कहा है कि सरकार ने वादा किया था कि उप चुनावों के बाद बागवानों को एमआईएस के पैसे का भुगतान कर दिया जाएगा। उप चुनाव हुए एक महीने से अधिक का समय हो गया है बावजूद इसके एक भी बागवान को एमआईएस में खरीदे सेब का भुगतान नहीं हुआ। यह सरकार की कथनी और करनी में फर्क को जाहिर करता है।
संयुक्त किसान मंच का कहना है कि बागवानों के साथ लूट खसोट के लिए आढ़तियों के साथ एपीएमसी और सरकार बराबर के दोषी हैं। सीजन के दौरान एपीएमसी की मंडियों में बागवानों के साथ लूट की खुली छूट दी गई। रुमाल के नीचे बोलियां लगी, मनमाना लेबर चार्ज और छूट वसूली गई, बैंक डिमांड ड्राफ्ट के नाम पर कटौती और एपीएमसी के बैरियरों पर अवैध वसूली पर रोक नहीं लगाई गई।
सरकार ने विधानसभा में माना है कि एमआईएस मेंखरीदे सेब का 2013 से 2020 तक आठ सालों का करीब 671.29 लाख रुपये का भुगतान लंबित है। अपनी फसल का पैसा न मिलने के कारण बागवानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
एमएसपी लागू हो तो किसान बागवानों को मिलेगी राहत
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान का कहना है कि फलों, सब्जियों सहित अन्य फसलों पर एमएसपी ( न्यूनतम समर्थन मूल्य) की मांग इसी लिए की जा रही है, ताकि किसान बागवानों को उनकी उपज की कीमत के लिए सालों इंतजार न करना पड़े।