हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ के नेताओं ने प्रदेशव्यापी आंदोलन को और तेज करने का एलान किया है। इसी कड़ी में 27 मार्च को सिरमौर जिले के नाहन में विरोध रैली की जाएगी। महासंघ नेताओं ने उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है और यह ट्रेड यूनियन एक्ट का सरासर उल्लंघ्घन है। कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद नहीं किया तो विभाग अध्यक्षों का घेराव करने की चेतावनी भी दी है।
विज्ञापन
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान, महासचिव हीरा लाल वर्मा, मुख्य सलाहकार विनोद कुमार ठाकुर, उपाध्यक्ष अरविंद मेहता, समर चौहान और नरेश ठाकुर ने शनिवार को संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि प्रदेश के कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग से हो रहे आर्थिक नुकसान और सरकार की उदासीनता चिंताजनक है। पहला मौका है कि जब मूल वेतन के मामले में हिमाचल सरकार ने पंजाब पैट्रन को लागू नहीं किया है।
महासंघ का एक प्रतिनिधिमंडल अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रमोद सक्सेना से भी मिला है। कमेटी की कोई बैठक अभी तक नहीं हुई है। मांग उठाई कि दो साल के राइडर को खत्म किया जाए। 4-9-14 साल की सेवा के बाद टाइम स्केल दिया जाए। कर्मचारियों को 31 दिसंबर, 2015 के मूल वेतन पर ही फैक्टर लगाया जाए। कर्मचारियों को 31 दिसंबर, 2015 की स्थिति में 2.59 का फैक्टर लगना एक संवैधानिक प्रक्रिया है।