एचपीएमसी के लिए इस करार को मुनाफे की नई राह के तौर पर देखा जा रहा है। रेलवे जैसे बड़े विभाग में उत्पादाें की खपत खासी अधिक रहती है। ऐसे में निगम को घाटे से उबरने में खासी मदद मिलेगी।
गौरतलब है कि वर्तमान में एचपीएमसी विभिन्न जूस, एप्पल साइडर, स्क्वैश, कंसनट्रेट, जैम आदि प्रोडक्ट तैयार कर रहा है। मशरूम रिसर्च सेंटर के मार्गदर्शन में धर्मपुर में एचपीएमसी मशरूम का मुख्य प्लांट बनाने जा रहा है।
इसकी कवायद शुरू हो चुकी है। प्रदेश भर में इसकी यूनिटें स्थापित की जा रही हैं। यह कवायद रेलवे की मशरूम की मांग को ध्यान में रखकर चलाई जा रही है। इसके पूरा होने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। मशरूम रिसर्च सेंटर सोलन में बाकायदा प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
एचपीएमसी के जीएम सुरेंद्र माल्टु ने भारतीय रेलवे से करार होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि एचपीएमसी को घाटे से उबारने के लिए यह कवायद मील का पत्थर साबित होगी। इस पर वर्कआउट शुरू कर दिया गया है। उत्पादों की गुणवत्ता उम्दा रखने की कोशिश की जाएगी।
बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि रेलवे विभाग के साथ करार हो गया है। मंगलवार को इस संबंध में आईआरसीटीसी के चेयरमैन से वार्ता हो चुकी है। टमाटर का सॉस, नींबू पानी, फलों का रस और मशरूम रेलवे विभाग को सप्लाई किया जाएगा। रेलवे की पैंट्री और रेलवे स्टेशन पर स्टॉल से उत्पादों की बिक्री होगी।