हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार को आईजीएमसी शिमला के ट्रॉमा सेंटर की खस्ताहालत को लेकर मुख्य सचिव को संभावित विभागों के प्रमुखों के साथ बैठक करने के निर्देश दिए। अदालत ने आईजीएमसी की स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार की सुस्त कार्यप्रणाली पर भी रोष जताया। आईजीएमसी ट्रॉमा सेंटर को बनाने में देरी के चलते विभाग पर फाइलों को एक से दूसरे टेबल पर धकेलने का काम किया गया। इसी वजह से ट्रामा सेंटर को सुचारु रूप से चलाने में विभाग फेल हो रहा है।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रामचंद्र राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने की। आईजीएमसी के अलावा दो अन्य ट्रॉमा सेंटर टांडा और चंबा के हालात भी ठीक नहीं है। वहां पर न तो भवन का निर्माण पूरा हुआ है और न ही मशीनरियां व उपकरण खरीदे गए। प्रदेश के ट्रॉमा सेंटरों में न नर्सिंग स्टॉफ, न पैरामेडिकल और और न ही दूसरे रिक्त पड़े पदों को भरा गया है। अदालत को बताया गया कि मुख्यमंत्री के उद्घाटन के बावजूद लोक निर्माण विभाग ने ट्रॉमा सेंटर आईजीएमसी को नहीं सौंपा। वर्तमान आईजीएमसी के पुराने भवन में एक ही मंजिल पर कैजुअल्टी, ट्राॅमा वार्ड, ऑपरेशन थियेटर और आपातकालीन विभाग हैं। अदालत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार स्वास्थ्य संबंधित सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए खास रुचि नहीं ले रही है। इस मामले की अगली सुनवाई 19 जून को होगी।