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Himachal: अब राजभवन का जीर्णोद्धार भी नहीं होगा, हेरिटेज भवन को जस का तस रहने देंगे राज्यपाल

Thu, 15 Jun 2023 09:50 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

वर्ष 1832 से पहले बने ऐतिहासिक बार्नेस कोर्ट भवन में अंग्रेजों के शासनकाल में उनके कमांडर-इन-चीफ रहते थे, जबकि वर्तमान में यहां राजभवन चल रहा है।
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शिमला में राजभवन की ऐतिहासिक इमारत बार्नेस कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अब शिमला में राजभवन की ऐतिहासिक इमारत बार्नेस कोर्ट का जीर्णोद्धार नहीं होगा। इसे फिलहाल पीटरहॉफ शिमला के लिए शिफ्ट करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। इस हेरिटेज भवन को वर्तमान राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल जस का तस रहने देना चाहते हैं। पिछले राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के कार्यकाल में साल भर पहले इस ऐतिहासिक भवन को गिराकर इसे दोबारा से खड़ा करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था।

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बाद में यह तय हुआ कि धरोहर भवन होने के नाते इसे पूरी तरह से गिराना सही नहीं होगा। इसका जीर्णोद्धार किया जा सकता है, मगर यह भी ठीक उसी रूप में होना चाहिए, जिस तरह से यह इमारत है। 190 साल से ज्यादा पुराने इस बार्नेस कोर्ट भवन के जीर्णोद्धार की अवधि में राज्यपाल को पीटरहॉफ में बैठाने की तैयारी थी, क्योंकि भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान ने संबंधित प्रस्ताव ठुकरा दिया था।

वर्ष 1832 से पहले बने ऐतिहासिक बार्नेस कोर्ट भवन में अंग्रेजों के शासनकाल में उनके कमांडर-इन-चीफ रहते थे, जबकि वर्तमान में यहां राजभवन चल रहा है। लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के अलावा तीन एजेंसियों ने इसका निर्माण ऑडिट भी कर लिया था। इसके अनुसार इस भवन के पुरानी धज्जी दीवार तकनीक से बने होने के कारण इसका जीर्णोद्धार मुश्किल माना गया था, जबकि इस भवन को गिराकर उसी ढांचे में दोबारा तैयार करना आसान बताया जा रहा था।
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उस समय के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मंत्रणा के बाद उनके सचिव ने मुख्य सचिव को इसका प्रस्ताव भेजा था। इस काम की प्रारंभिक लागत करीब 44 करोड़ रुपये आंकी गई थी, पर बाद में तय हुआ कि धरोहर होने के नाते बार्नेस कोर्ट इमारत पूरी तरह से नहीं गिरेगी। इसका धज्जी दीवारें लगाकर जीर्णोद्धार होगा। सुर्खी, चूना और देवदार की लकड़ी से अंग्रेजों के जमाने के बने इस भवन की नई दीवारें खड़ी की जाएंगी। इसके जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी आईआईटी रुड़की को दी गई।

भारत-पाक के बीच यहीं हुआ था शिमला समझौता
इस भवन के ग्राउंड फ्लोर के कीर्तिकक्ष में 3 जुलाई 1972 को भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच शिमला समझौता हुआ था। यहां उस वक्त की कुर्सियां और मेज आज भी रखे गए हैं।
 

‘मुझे इस धरोहर भवन में अभी किसी तरह के जीर्णोद्धार की जरूरत महसूस नहीं हो रही है। वर्तमान में यह जिस रूप में है, उसी में सही है।’ - शिव प्रताप शुक्ल, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश, शिमला।

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