हरिकृष्ण ने सतीश को फोन किया और उसकी गिरफ्तारी की सूचना दी। हेड कांस्टेबल ने गिरफ्तारी से बचाने के लिए सतीश से तीन किस्तों में नौ हजार रुपये की मांग की। सतीश ने इसकी शिकायत विजिलेंस से की। विजिलेंस ने जाल बिछाया और आरोपी पुलिस कर्मी को तीन हजार रुपये देने के लिए बुलाया।
28 जनवरी, 2014 को सराहां में सब्जी की दुकान के समीप ही सतीश ने हरिकृष्ण को तीन हजार दिए। विजिलेंस टीम ने उसे रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। जिला न्यायवादी ने बताया कि इसके बाद विजिलेंस में भ्रष्टाचार अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। अदालत में 26 गवाह और दलीलों के दम पर यह अभियोग साबित किया गया।
अदालत ने आरोपी एचएचसी हरि कृष्ण निवासी गड्डा बुड्डी को भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा सात के तहत तीन साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना, धारा 13 (2) के तहत चार साल कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।