पंचायतों को यह धनराशि पेयजल, स्वच्छता, सड़क, सामुदायिक भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए दी गई थी। बावजूद इसके, कुछ पंचायतों में योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी, तकनीकी अड़चनें और प्रशासनिक कारणों के चलते कार्य पूरे नहीं हो सके। पंचायतीराज विभाग अब इस बात को लेकर असमंजस में है कि लंबित राशि को वापस किया जाए या पंचायतों को इसे खर्च करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए। इसी संदर्भ में केंद्र सरकार से स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे गए हैं। विभाग का यह भी कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए पंचायतों की मॉनिटरिंग और योजना क्रियान्वयन प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा। अब सबकी नजरें केंद्र सरकार के जवाब पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि लंबित राशि का आगे क्या होगा और पंचायतों को किस प्रकार आगे की कार्रवाई करनी होगी।