हिमाचल प्रदेश में सूखे जैसे हालात से गेहूं की फसल पर भयंकर मार पड़ रही है। इससे उत्पादन 25 फीसदी तक घटने की आशंका है। गेहूं प्रदेश में रबी की प्रमुख फसल है। लंबे समय से बारिश न होने से राज्य में गेहूं के दाने का आकार नहीं बढ़ पाया है। मैदानी इलाकों में तो अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से गेहूं की कटाई का समय है। ऐसे में अब बारिश होती है तो तैयार फसल खराब होने का डर भी किसानों को सताने लगा है।
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किसान संघर्ष समिति के महासचिव संजय चौहान का कहना है कि करीब दो माह से बारिश न होने के कारण गेहूं की फसल पर मार पड़ रही है। दानों का आकार नहीं बढ़ पा रहा है। इससे उत्पादन तो गिरेगा ही, बीज भी कमजोर होगा। कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के वैज्ञानिक डॉ. डीके बनयाल के अनुसार राज्य के जिन इलाकों में गेहूं की फसल अभी पकी नहीं है, वहां बारिश होती है तो फसल नुकसान से बच पाएगी।
मंडी और कांगड़ा के कई क्षेत्रों में गेहूं की फसल अभी पकी नहीं है। इन इलाकों में मौजूदा समय में बारिश होती है तो फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में करीब 6.72 लाख मीट्रिक टन गेहूं की फसल होती है। उच्च फसल किस्में करीब 3.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में होती है।
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किस वर्ष कितना उत्पादन (लाख मीट्रिक टन में) 2017-18 2018-19 2019-20 2020-21
5.98 6.82 6.27 6.72
कुल खाद्यान्न उत्पादन (लाख मीट्रिक टन में) 2017-18 2018-19 2019-20 2020-21
15.81 16.92 15.94 16.74