शिक्षा निदेशक की ओर से सिर्फ सीबीएसई और आईसीएससी स्कूलों के पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को स्कूल बुलाने या न बुलाने के लिए एसएमसी और पीटीए से चर्चा कर फैसला लेने के आदेशों पर छात्र-अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि यह आदेश स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि शीतकालीन सभी एचपी बोर्ड और अन्य बोर्ड के स्कूलों में ऑनलाइन ही कक्षाएं और परीक्षाएं ली जाएं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में 90 फीसदी से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जहां पर स्कूल प्रबंधन समिति और पीटीए सक्रिय ही नहीं है। ऐसे में स्कूल प्रशासन कैसे अभिभावकों की सहमति के बिना ऐसा निर्णय लेगा? उन्होंने निदेशक उच्च शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्कूलों में बच्चों को बुलाए जाने को लेकर अपने आदेशों में ही स्पष्ट करें कि कक्षाएं चलेंगी या नहीं? पीटीए या एसएमसी पर बात न छोड़ी जाए। चूंकि, मामला छोटे बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। उन्होंने इस संदर्भ में जारी निदेशक के आदेशों को अधूरा करार दिया है।
कहा कि ग्रीष्मकालीन स्कूलों में तीन माह और कक्षाएं चलेंगी जबकि, शीतकालीन स्कूलों में महज दस से बारह दिन कक्षाएं लगेंगी। अब माह के अंतिम एक सप्ताह के लिए स्कूल खोलकर और ऑफलाइन कक्षाएं लगवाकर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि सरकार और विभाग सीधे आदेश जारी करे कि शीतकालीन स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं स्कूलों में न करवाकर ऑनलाइन ही करवाई जाएं। 15 नवंबर से स्कूलों में परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, इसलिए फैसला जल्द लिया जाए।