हिमाचल प्रदेश में अब फूलों, औषधियों आदि कई तरह के उत्पादों की अलग मंडियां खोली जा सकेंगी। स्ट्राबरी जैसे फल, पशु उत्पाद, मसाले, दालें, तिलहन आदि भी मंडियों में बेचे जा सकेंगे। प्रदेश मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है कि अब 131 की बजाय 259 वस्तुएं एपीएमसी एक्ट में शामिल होंगी। इनकी इसी कानून के तहत नियमानुसार खरीद-फरोख्त करनी होगी।
सोमवार को प्रदेश मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश कृषि और बागवानी उत्पाद विपणन (विकास व विनियमन) अधिनियम 2005 की वर्तमान अनुसूची में अधिक मदों को शामिल करने को मंजूरी दी है। अब इसमें अनाज, दालें, तिलहन, सब्जियों के रेशे, स्ट्राबरी जैसे फल, पशुपालन उत्पाद एवं पशुधन, मसाले, औषधीय और सुगंधित पौधों की प्रजातियां, फूल, गमलों में लगे पौधों और उनके बीज और अन्य उत्पादों सहित 259 वस्तुएं शामिल की गई हैं।
हिमाचल प्रदेश कृषि उत्पाद विपणन बोर्ड के प्रबंधक निदेशक नरेश ठाकुर ने कैबिनेट के इस फैसले को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जिस तरह से टापरी में अलग से किन्नौरी सेब की मंडी है। ठीक ऐसे ही स्ट्राबरी जैसे फलों, औषधीय पौधों, मसालों, दलहनों आदि की भी अब अलग से मंडियां खोली जा सकेंगी। सामान्य मंडियों में भी इन उत्पादों को बेचा जा सकेगा। कोविड काल में भी बहुत से उत्पादों को मंडियों में इसलिए नहीं बेचा या खरीदा जा सका, क्योंकि ये अधिसूचित नहीं थीं।
परवाणू में खोली जा रही पहली फूल मंडी
परवाणू में पहली फूल मंडी खोली जा रही है। इसे कृषि उत्पाद मंडी समिति (एपीएमसी) की ओर से खोला जा रहा है। हालांकि, फूल अभी तक एपीएमसी एक्ट के तहत अधिसूचित वस्तु नहीं थी, मगर आगे से यह इस सूची में शामिल हो गया है। अभी तक फूलों के लिए अधिसूचित मंडियां राज्य से बाहर हैं। अब राज्य के भीतर भी खोली जा सकेंगी।