दलाई लामा के निजी सचिव तेंजिन टाकला ने बताया कि धर्मगुरु ने डॉ. मोहन भागवत के समक्ष धार्मिक सद्भावना की बात पर जोर दिया। दलाई लामा ने कहा कि वह भारत में सबसे लंबे समय तक रहने वाले मेहमान बन गए हैं। भारत के लोगों और सरकार ने उनकी मेहमान नवाजी में कोई कसर नहीं छोड़ी, जिसके लिए वह सदैव आभारी रहेंगे।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने सोमवार सुबह मैक्लोडगंज में धर्मगुरु दलाई लामा से मुलाकात की। करीब 35 मिनट की इस मुलाकात में दोनों के बीच तिब्बत मुद्दे को लेकर बातचीत हुई है। मुलाकात के बाद भागवत मैक्लोडंगज से सीधा गगल एयरपोर्ट पहुंचे। यहां अपना पांच दिवसीय दौरा खत्म कर वह स्पाइसजेट की फ्लाइट से दिल्ली रवाना हो गए।
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दलाई लामा के निजी सचिव तेंजिन टाकला ने बताया कि धर्मगुरु ने डॉ. मोहन भागवत के समक्ष धार्मिक सद्भावना की बात पर जोर दिया। दलाई लामा ने कहा कि वह भारत में सबसे लंबे समय तक रहने वाले मेहमान बन गए हैं। भारत के लोगों और सरकार ने उनकी मेहमान नवाजी में कोई कसर नहीं छोड़ी, जिसके लिए वह सदैव आभारी रहेंगे। बैठक के दौरान निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग ने दलाई लामा और तिब्बत मुद्दे पर भारत की ओर से समर्थन देने पर आभार भी जताया।
इस मुलाकात के दौरान आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी इंद्रेश कुमार और निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग भी मौजूद रहे। इंद्रेश कुमार ने बताया कि दलाई लामा ने मुलाकात के दौरान भारत को धार्मिक सद्भावना का मॉडल बताया। भारत को इसे दुनिया को बताना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने भी तिब्बत को भारत का गहरा समर्थन देने की बात कही है। वहीं, पत्रकारों से बात करते हुए पेंपा सेरिंग ने कहा कि यह बहुत स्वाभाविक है कि जब मोहन भागवत धर्मशाला में हों तो वह दलाई लामा से मिलते हैं। उल्लेखनीय है कि भागवत की यात्रा वास्तव में तब शुरू हुई, जब दलाई लामा ने 15 दिसंबर से लोगों से मिलना-जुलना शुरू किया। दलाई लामा सबसे पहले पेंपा सेरिंग से मिले थे। भागवत दूसरे ऐसे शख्स हैं, जिनसे दलाई लामा मिले।