रिटायर्ड मेजर जनरल और रक्षा विशेषज्ञ डॉ. जीडी बक्शी
- फोटो : अमर उजाला
रिटायर्ड मेजर जनरल और रक्षा विशेषज्ञ डॉ. जीडी बक्शी ने चीन की विस्तारवादी नीति के खिलाफ सोमवार को मैकलोडगंज के टिपा में जमकर गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा कि चीनी सैनिकों से झड़प के वक्त अगर मैं गलवां घाटी में होता तो तोपें चलवा देता। उन्होंने कहा कि तिब्बत की आजादी भारत ही नहीं, बल्कि विश्व हित में है। सोमवार को तिब्बत समुदाय से संवाद के बाद में टिपा में पत्रकार वार्ता में बख्शी ने कहा कि कोविड-19 का जनक वुहान है।
इसके बावजूद चीन पूरी दुनिया से अपनी इस करतूत को छिपाता रहा है। उन्होंने कहा कि चीन ने मार्च 2020 में लद्दाख में हमला कर दिया। अभी तक चीन की कार्यप्रणाली में महायुद्ध के संकेत दिखते हैं। पाकिस्तान के मुद्दे पर मेजर जनरल बक्शी ने कहा कि उड़ी और बालाकोट स्ट्राइक के बाद कई माह तक पाकिस्तान शांत रहा। अब फिर चीन ने पाक को उकसाया है। इससे पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर और पंजाब पर बुरा असर डाला है।
उन्होंने कहा कि अब भारत भी शांत नहीं रहेगा। चीन ने तिब्बत को बहुत अधिक प्रभावित कर दिया है। उनका शोषण किया है और लाखों की हत्या कर दी। भारत में जहां कट्टरपंथी सामने आ रहे हैं, वहां चीन हस्तक्षेप कर रहा है। जीडी बक्शी ने कहा कि तीन दशक से भारत पर हमले हो रहे हैं। भारत ने वर्ष 2016 में उड़ी में जवाब देने की शुरुआत की। इसके बाद बालाकोट स्ट्राइक की। ऐसे ही जवाब की फिर से जरूरत है। पूर्व की सरकारों से वर्तमान सरकार अच्छी है। मेजर जनरल बक्शी ने कहा कि विंटर ओलंपिक चीन में हो रही हैं। मेरी निजी राय है कि किसी भी एथलीट को चीन ओलंपिक में नहीं जाना चाहिए।