उन्होंने केवल कार में फंसे यात्रियों को एक-एक कर हेलीकॉप्टर में चढ़ाना शुरू किया। शाम होने तक बचाव अभियान पूरा नहीं हो पाया और पांच यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। कर्नल क्रेस्टो ने यात्रियों का हौसला टूटने नहीं दिया और वे हवा में लटकी केवल कार में बाकी बचे पांच यात्रियों के साथ रूक गए। रातभर यात्रियों को गाने सुनाते रहे और उनका हौसला बढ़ाते रहे। अगले दिन फिर बचाव अभियान शुरू हुआ और कर्नल क्रेस्टो ने सभी यात्रियों को रेस्क्यू कर लिया। टिंबर ट्रेल रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था। गोवा के रहने वाले कर्नल क्रेस्टो के पिता नौसेना में अफसर थे।
1978 में इवान जोसफ क्रेस्टो को पैरा सिक्योरिटी फोर्स में कमीशन मिला। मिलिट्री ऑपरेशन निदेशालय समेत उन्होंने कई अहम पदों पर सेवाएं दीं। कर्नल क्रेस्टो के एक सहयोगी ने बताया कि वे पेशेवर और समर्पित शख्सियत थे। स्काई डाइविंग के भी विशेषज्ञ थे। विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय बेवाक होकर रखते थे। उन्होंने बताया कि कर्नल क्रेस्टो इन दिनों सिडनी आस्ट्रेलिया में लोकल स्कूल में मैथ पढ़ाते हैं। आज भी कई अधिकारी उनकी बहादुरी के किस्से सुनाते हैं।