चीन से सटे समदो बॉर्डर के लिए एक और सामरिक महत्व की सड़क का निर्माण होगा। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति और किन्नौर को जोड़ने वाली भावानगर-मुद सड़क निर्माण में रोड़ा बनी फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब लोक निर्माण विभाग इस सड़क का काम शुरू करेगा।
सड़क बनने से शिमला से काजा की दूरी 150 किलोमीटर और समदो बॉर्डर की दूरी 100 किलोमीटर कम हो जाएगी। सेना को अब काजा पहुंचने में चार घंटे कम लगेंगे। करीब 32 किमी लंबी यह सड़क समुद्रतल से 12 हजार फीट की ऊंचाई से गुजरेगी। दशकों से इस सड़क की मांग उठ रही थी।
भावा-मुद सड़क निर्माण के लिए केंद्र ने भूमि अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। पिछले कई सालों से भूमि लोनिवि के नाम नहीं होने से निर्माण लटका हुआ था। अब इसकी प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब सेना के साथ आम लोगों को किन्नौर के मलिंग होकर लंबे सड़क मार्ग से नहीं गुजरना पड़ेगा।
समदो बॉर्डर पर तैनात सेना और आईटीबीपी के जवानों को भी सुविधा होगी। यह सड़क किनौर के भावानगर से निकल कर लाहौल-स्पीति के अंतिम गांव मुद में मिलेगी। आतर्गु पूल के पास यह सड़क समदो-काजा-ग्रांफू मार्ग से जुड़ेगी। स्पीति को किन्नौर से जोड़ने का यह दूसरा अहम मार्ग होगा। इससे स्पीति घाटी के पर्यटन को भी नए पंख लगेंगे।
स्थानीय विधायक और जनजातीय मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने बताया कि सड़क निर्माण को वन विभाग की मंजूरी मिल गई है। भूमि स्थानांतरण की प्रक्रिया आरंभ होने से इसका काम युद्घस्तर पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भावा-मुद सड़क सामरिक महत्व के साथ घाटी के पर्यटकों को नई दिशा प्रदान करेगी।