शहीद बेटे प्रमोद नेगी के इंतजार में पिछले 29 घंटे से माता तारा देवी और पिता देवेंद्र नेगी ने पलकें भी नहीं झपकंी थी। घर पर माता-पिता और बहन मनीषा नेगी के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। वहीं सेना में तैनात छोटे भाई जवान नितेश नेगी शुक्रवार से ही पार्थिव देह से लिपट-लिपटकर रो रहे थे। शनिवार को जैसे ही घर से प्रमोद अनंत यात्रा के लिए निकले तो सड़क किनारे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के छात्रों ने हाथों में तिरंगा लेकर शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
वहीं पहाड़ियोंं पर बैठे सैकड़ों लोग शहादत पर चर्चा करते रहे। राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि के दौरान हजारों लोगों की आंखें नम थीं। शनिवार को शहीद के सम्मान में शिलाई बाजार भी बंद रखा गया। शहीद की शहादत पर समूचे गिरिपार में शोक की लहर तो है, लेकिन इलाके के लाखों ग्रामीणों का सीना फख्र से भी चौड़ा हो गया है।
समूची शिलाई घाटी प्रमोद नेगी अमर रहे के नारों से गूंज उठी। उधर, शहीद की माता तारा देवी का कहना था कि प्रमोद अकसर सेना में जाने की जिद करता था। वे कहती थी कि तुम टीचर बनों, लेकिन बेटे की जिद के आगे मां ने भी घुटने टेक दिए। महज 18 साल की उम्र में प्रमोद नेगी भारतीय सेना की 9 पैरा रेजिमेंट का हिस्सा बन गए।