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दिल्ली में वीवीआईपी तक नहीं पहुंच पाए लाहौली फूलों के बुके

Fri, 23 Jul 2021 11:53 AM IST
अरविन्द ठाकुर दिनेश जस्पा, अमर उजाला नेटवर्क, उदयपुर (लाहौल-स्पीति)

सार

पुष्प उत्पादकों ने बताया कि कोरोना से पूर्व वर्ष में उन्हें एक छड़ी फूल के 10 से 15 रुपये तक दाम मिले थे। लाहौल के चंद्रा और पट्टन घाटी के सैकड़ों किसान वर्ष 2009 से पुष्प उत्पादन को बढ़ावा देने की कोशिश में लगे हैं। 
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लिलियम प्रजाति के फूल खेतों में ही मुरझाने लगे हैं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली में वीवीआईपी तक इस बार अभी तक लाहौली फूलों के बुके नहीं पहुंच पाए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह पुष्प उत्पादकों को परिवहन सुविधा नहीं मिलना बताया जा रहा है। ऐसे में करीब 40 फीसदी लिलियम प्रजाति के फूल खेतों में ही मुरझाने लगे हैं। अगर समय रहते परिवहन की सुविधा नहीं मिली तो लाहौल स्थित पट्टन घाटी के पुष्प उत्पादकों को लाखों का नुकसान हो सकता है।

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हालांकि, कोरोना महामारी पर काफी हद तक नियंत्रण होने से दिल्ली शहर में वीवीआईपी, बड़े होटलों, विवाह व धार्मिक कार्यक्रमों के लिए लिलियम प्रजाति के फूलों की अधिक मांग है। परिवहन सुविधा न होने से पट्टन घाटी के पुष्प उत्पादक सजावटी फूलों की खेप दिल्ली की गाजीपुर फूल मंडी में नहीं भेज पा रहे हैं। पुष्प उत्पादकों ने बताया कि कोरोना से पूर्व वर्ष में उन्हें एक छड़ी फूल के 10 से 15 रुपये तक दाम मिले थे। लाहौल के चंद्रा और पट्टन घाटी के सैकड़ों किसान वर्ष 2009 से पुष्प उत्पादन को बढ़ावा देने की कोशिश में लगे हैं। 

पुष्प उत्पादक प्रीतम सिंह, विकास कुमार, सुरेंद्र कुमार और प्रेम लाल ठाकुर ने कहा कि कोरोना काल से पूर्व में उदयपुर और मड्ग्रां क्षेत्र के पुष्प उत्पादक उदयपुर-दिल्ली रूट पर चलने वाली बस में सीधे 25 से 30 किग्रा तक के चार डिब्बे भेजते थे। जाहलमा क्षेत्र के पुष्प उत्पादक जाहलमा-रिकांगपिओ बस से मनाली तक उपरोक्त हिसाब से फूलों के चार डिब्बे मनाली तक भेजते थे। वहां से आगे दिल्ली रूट की बस से यह डिब्बे गाजीपुर मंडी पहुंचाए जाते थे।
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इसका उन्हें दिल्ली तक चार डिब्बों पर एक सवारी का किराया देना पड़ता था। उधर, उपायुक्त लाहौल-स्पीति नीरज कुमार ने कहा कि आरएम केलांग से बात कर पट्टन घाटी के पुष्प उत्पादकों की समस्या दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

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