जिला सोलन में भारी बारिश से नुकसान का कहर दूसरे दिन भी जारी रहा। हालांकि बुधवार सुबह से मौसम साफ रहा। कालका-शिमला एनएच पर ब्रुरी के समीप पहाड़ी दरकने से एनएच-5 एक घंटा बंद रहा है। इस बीच कंडाघाट और चंबाघाट से ट्रैफिक बसाल रोड से रवाना किया गया। करीब 12 बजे मार्ग वाहनों की आवाजाही के लिए बहाल किया गया।
लोनिव के बंद पड़ी 40 सड़कों में से 33 मार्ग खुल गए हैं जबकि सात मार्ग दूसरे दिन भी बंद रहे। विभाग के कर्मचारी फील्ड में मार्ग खोल रहे हैं। बीबीएन में बारिश के साथ तेज हवाओं से मक्की की फसल जमीन पर बिछ गई। जलशक्ति विभाग ने बारिश के दूसरे दिन पेयजल लिफ्टिंग कार्य शुरू कर दिया है। इसके अलावा बीबीएन में बारिश के साथ चली तेज हवा से मक्की की फसलें खेतों में बिछ गई है। इस कारण किसानों को भी नुकसान पहुंचा है।
जानकारी के अनुसार कालका-शिमला एनएच पर सुबह करीब 11 बजे ब्रुरी तरनतारण होटल के समीप पहाड़ी से मलबा गिरने से एनएच बंद हो गया। इस कारण हादसे वाले क्षेत्र के दोनों तरफ लंबा जाम लग गया। इस बीच चंबाघाट और कंडाघाट से ट्रैफिक को बसाल मार्ग से रवाना किया गया। एक घंटे के बाद फोरलेन कार्य कर रही कंपनी ने मार्ग को वाहनों की आवाजाही के खोल दिया था। इसके बाद भी यातायात धीमी गति से चलता रहा।
रामशहर में खेतों में बिछी मक्की की फसल
नालागढ़ के पहाड़ी क्षेत्र की पंचायतों में पहले सूखे ने मक्की को नुकसान पहुंचाया अब बारिश के साथ तेज आंधी ने मक्की को जमीन पर बिछा दिया। मित्तियां और आसपास पंचायतों में तेज हवाओं के कारण मक्की की फसल को भारी नुकसान हुआ है। किसान मक्की की फसल में फाल आर्मी वर्मी के प्रकोप से पहले ही परेशान थे। अब बारिश शुरू हुई तो तेज हवा के कारण मक्की की फसल तबाह हो गई है। किसान हेतराम, बीर सिंह, श्याम लाल, श्यामलाल, पपराली निवासी कमल, निक्कू राम और गुरचरण ने भी नुकसान होने की बात कही है और सरकार से मुआवजे की मांग की है। नालागढ़ के तहसीलदार ऋषभ शर्मा में कहा है कि पटवारी से इस बारे में रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।
स्कूल भवन और विकास खंड कार्यालय को खतरा
मंगलवार रात से लगातार हो रही भारी बारिश से हाटकोट पंचायत के खटनाली नाले में भारी भूमि कटाव हो गया। इस कारण नाले के साथ सटे आदर्श प्राथमिक पाठशाला कुनिहार और विकास खंड कुनिहार कार्यालय भी खतरे की जद में आ गए हैं। बीती रात प्राइमरी स्कूल के शौचालय तक की जमीन बह गई। साथ ही प्राकृतिक जल स्रोत खटनाली को जाने वाले रास्ते का करीब 15 से 20 फीट रास्ता भी भूमि कटाव में बह गया और रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।