हिमाचल प्रदेश भर में कोरोना महामारी के चलते छह माह बाद रविवार को 23वें जनमंच का आयोजन किया गया। करसोग में हुए कार्यक्रम में जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने लोल गांव में प्रस्तावित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का विरोध कर रहे शिकायतकर्ता को ही फटकार दिया। मंत्री ने संयम खोते हुए फरियादी से ओ मिस्टर कहते हुए तू तड़ाक से बात की। उधर, कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां के सेराथाना में वन एवं खेल मंत्री राकेश पठानिया और स्थानीय विधायक दो घंटे देरी से पहुंचे और मात्र एक घंटे में कार्यक्रम निपटा दिया। इस बीच भारी बारिश में भीगते हुए लोग इंतजार करते रहे। प्रशासन ने भी यहां कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं किया था।
उधर, मंडी के करसोग में हुआ यूं कि गुरबक्श ठाकुर ने लोल गांव में नगर परिषद क्षेत्र के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का विरोध जताया। उन्होंने कहा कि प्लांट नप क्षेत्र में बने, क्योंकि यहां उठाऊ पेयजल योजनाएं हैं। लीकेज हुई तो पानी दूषित होगा। 2015 में धर्मपुर बस स्टैंड भी बह गया था। तब सरकार ने निर्देश दिए थे कि खड्ड किनारे सरकारी संपत्ति पर इसका निर्माण होगा। अपने विधानसभा क्षेत्र का नाम सुनते ही मंत्री भड़क गए और और कहने लगे ओ मिस्टर सरकारी मंच है।
यह कोई पार्टी का मंच नहीं है। जहां सरकार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बना रही है, वह सरकारी जमीन है। निजी होगी तो सरकार भूमि अधिग्रहण करेगी। इस पर शिकायतकर्ता ने कहा कि कहां से अधिग्रहण करेंगे, वहां तो जमीन ही नहीं है। इस पर मंत्री बोले-हम करेंगे, सरकार करेगी, तू करेगा क्या। आप होते कौन हैं रोकने वाले। शिकायतकर्ता ने कहा कि यह तानाशाही है तो हम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। तो मंत्री तापक से बोले तुझे जहां जाना है जा।
उधर, बिलासपुर के जुखाला में एक महिला 15 साल से पेयजल कनेक्शन न लग पाने के कारण समस्या बताते हुए ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी के सामने ही रो पड़ीं। वहीं, हमीरपुर के कांगू स्कूल में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सरवीण चौधरी पहुंचीं थीं। यहां एक पिता का आरोप था कि उनके बेटे का ऑपरेशन हुआ है, लेकिन सहकारी सभा का सचिव बेटे के इलाज के लिए उनकी ही एफडी के पैसे उन्हें नहीं दे रहा।
बिलासपुर जिले के जुखाला में हुए जनमंच में एक व्यक्ति ने अवैध खनन के बारे में शिकायत की। उसने कहा कि खनन से उनकी जमीन खराब हो गई। इस पर जनसमस्याएं सुनने आए ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी के सामने ही दो पक्षों में झड़प हो गई।
23वें जनमंच में 11 जिलों में कुल 1609 शिकायतें सुुनीं
प्रदेश 11 जिलों में हुए जनमंच में कुल 1609 शिकायतें सुुनी गईं। इनमें से 845 का निपटारा मौके पर किया गया। इस बार लाहौल-स्पीति में जनमंच नहीं हुआ। कोरोना संक्रमण के कारण पिछले छह माह से जनमंच का आयोजन नहीं किया गया था। जनमंच से पहले लोगों की समस्याओं को सुनने के लिए प्री जनमंच का आयोजन किया गया था। जनमंच में जो शिकायतें हल नहीं हुईं, उनको 15 दिन के भीतर सुलझाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।