यह कंपनी भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ परमोशन ऑफ इंडस्ट्रीज एंड इंटरनल ट्रेड से पंजीकृत नहीं है। ऐसे में अब 19.50 हजार लैपॅटाप की खरीद के लिए चल रही फाइनांशियल बिड में सिर्फ एक कंपनी बची है। इस एक कंपनी के रेट खुलने के बाद मामला अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट में जाएगा।
प्रदेश के स्कूलों-कॉलेजों के 19.50 हजार मेधावियों को दिए जाने वाले लैपटॉप की खरीद प्रक्रिया से चीन की कंपनी बाहर कर दी गई है। भारत सरकार ने चीन की कंपनियों से कारोबार नहीं करने का फैसला लिया है। लैंड बॉर्डर लॉ के कारण इस कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
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यह कंपनी भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ परमोशन ऑफ इंडस्ट्रीज एंड इंटरनल ट्रेड से पंजीकृत नहीं है। ऐसे में अब 19.50 हजार लैपॅटाप की खरीद के लिए चल रही फाइनांशियल बिड में सिर्फ एक कंपनी बची है। इस एक कंपनी के रेट खुलने के बाद मामला अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट में जाएगा।
शिक्षा विभाग की ओर से राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड की मेरिट में आने वाले दसवीं, बारहवीं कक्षा और कॉलेजों के 19.50 हजार विद्यार्थियों को लैपटॉप दिए जाने हैं। जयराम सरकार अपने कार्यकाल के दौरान अभी तक लैपटॉप नहीं दे सकी है। शैक्षणिक सत्र 2018-19 और 2019-20 के मेधावी विद्यार्थियों के लिए एक साथ लैपटॉप देने के लिए शिक्षा विभाग ने इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन को खरीद का जिम्मा सौंपा है। चार कंपनियों ने खरीद में हिस्सा लिया था।
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दो कंपनियां पहले ही प्रक्रिया से बाहर हो गई थीं। दो कंपनियों की जब टेक्निकल बिड खुली तो एक कंपनी चीन में पंजीकृत पाई गई। भारत सरकार के संबंधित विभाग के पास इस कंपनी का पंजीकरण नहीं है। ऐसे में कॉरपोरेशन ने इस कंपनी को खरीद प्रक्रिया से बाहर कर दिया है। अब कैबिनेट बैठक में यह फैसला होगा कि एक कंपनी को काम सौंपा जाए या नहीं। इस पूरी प्रक्रिया के चलते लैपटॉप के इंतजार में बैठे विद्यार्थियों का इंतजार और बढ़ गया।